August 26, 2026

आधार में जन्मतिथि संशोधन के नियम हुए सख्त, नया जन्म प्रमाणपत्र नहीं होगा मान्य, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आधार कार्ड में जन्मतिथि संशोधन को लेकर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है। अब आधार में जन्मतिथि बदलवाने के लिए नया जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना मान्य नहीं होगा। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केवल वही जन्म प्रमाणपत्र स्वीकार किया जाएगा, जिसमें संशोधन किया गया हो और जिसकी पंजीकरण संख्या पहले से दर्ज रिकॉर्ड से मेल खाती हो। इस फैसले का उद्देश्य आधार डेटा की शुद्धता और विश्वसनीयता को बनाए रखना है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के अनुसार, पिछले कुछ समय से यह देखा गया था कि बड़ी संख्या में लोग अपनी जन्मतिथि बदलवाने के लिए पुराने जन्म प्रमाणपत्र को निरस्त कराकर नई पंजीकरण संख्या के साथ नया प्रमाणपत्र बनवा लेते थे। इसके माध्यम से लोग अपनी वास्तविक उम्र को छिपाकर आधार में संशोधन करा लेते थे। इस प्रकार के मामलों का उपयोग विशेष रूप से सरकारी नौकरियों में आयु सीमा का लाभ उठाने, खेल प्रतियोगिताओं में कम उम्र का फायदा लेने और शैक्षणिक परीक्षाओं में पात्रता प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था। प्राधिकरण ने इस प्रकार की अनियमितताओं को रोकने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब आधार में जन्मतिथि संशोधन के लिए वही जन्म प्रमाणपत्र मान्य होगा, जिसकी पंजीकरण संख्या पुराने रिकॉर्ड से मेल खाती हो। यदि कोई व्यक्ति अलग पंजीकरण संख्या वाला नया प्रमाणपत्र प्रस्तुत करता है, तो उसे आधार संशोधन के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कदम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जन्मतिथि बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सकेगी। आधार सेवा केंद्रों के आंकड़ों के अनुसार, आधार संशोधन के कुल आवेदनों में से लगभग 80 प्रतिशत आवेदन जन्मतिथि से संबंधित होते हैं। पहले से ही यह नियम था कि कोई व्यक्ति अपने जीवन में केवल एक बार ही जन्मतिथि में संशोधन कर सकता है। हालांकि, कुछ लोग नई पंजीकरण संख्या के साथ नया जन्म प्रमाणपत्र बनवाकर इस नियम को दरकिनार कर रहे थे। अब नए नियमों के लागू होने के बाद इस प्रकार के प्रयास संभव नहीं हो सकेंगे। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि अब डिजिटल माध्यम से दस्तावेजों की जांच और सत्यापन किया जाएगा। इससे जन्म प्रमाणपत्र की पंजीकरण संख्या की तुरंत जांच की जा सकेगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि प्रस्तुत दस्तावेज वास्तविक और प्रमाणिक है। इससे आधार डेटाबेस की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सकेगा। इस नए नियम का सबसे अधिक प्रभाव उन युवाओं और खिलाड़ियों पर पड़ने की संभावना है, जो अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए जन्मतिथि में बदलाव करते थे। विशेष रूप से आयु वर्ग आधारित खेलों जैसे क्रिकेट, एथलेटिक्स और अन्य खेलों में उम्र से संबंधित फर्जीवाड़े को रोकने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके अलावा, शिक्षा क्षेत्र में भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में आयु संबंधी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के लखनऊ स्थित उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह ने बताया कि यह कदम आधार डेटाबेस की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सभी जिला प्रशासन और आधार सेवा केंद्रों को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि वे केवल अधिकृत और प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर ही जन्मतिथि संशोधन की प्रक्रिया पूरी करें। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों या गलत जानकारी के आधार पर आधार में संशोधन कराने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई आधार अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत की जा सकती है। प्राधिकरण का मानना है कि इस सख्त कदम से आधार प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी योजनाओं, नौकरियों और अन्य सेवाओं में सही पात्र व्यक्तियों को ही लाभ मिल सकेगा। साथ ही, इससे आधार डेटाबेस की विश्वसनीयता और सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। नए नियमों के लागू होने के बाद आधार सेवा केंद्रों पर दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया और अधिक सख्त हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस बदलाव से फर्जीवाड़े पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और आधार प्रणाली को और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाया जा सकेगा।

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