August 25, 2026

टीएमसी के बागी विधायक कासिम सिद्दीकी की ‘घर वापसी’, बोले- दीदी के साथ थे, हैं और रहेंगे

  • ऋतब्रता बनर्जी के गुट से अलग होकर फिर ममता बनर्जी के खेमे में लौटे अमदंगा के विधायक, बोले- मुझे गुमराह किया गया
  • पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर सियासी खींचतान तेज, विधानसभा में नेतृत्व को लेकर बागी गुट और पार्टी आमने-सामने

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी खींचतान के बीच बागी नेताओं की एक बार फिर पार्टी में वापसी शुरू होने की चर्चा तेज हो गई है। इस कड़ी में सबसे पहला बड़ा नाम उत्तर 24 परगना जिले के अमदंगा से तृणमूल कांग्रेस विधायक कासिम सिद्दीकी का सामने आया है। कुछ महीने पहले पार्टी से बगावत कर विपक्षी नेता ऋतब्रता बनर्जी के गुट के साथ गए कासिम सिद्दीकी ने अब फिर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे में लौटने की घोषणा की है। कासिम सिद्दीकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह ममता बनर्जी के साथ हैं और हमेशा उनके साथ रहेंगे। उन्होंने ऋतब्रता बनर्जी के गुट में शामिल होने के अपने फैसले को लेकर कहा कि उन्हें गुमराह किया गया था। उनके अनुसार, शुरुआत में उन्हें बताया गया था कि यह गुट भी ममता बनर्जी के नेतृत्व और उनके मार्गदर्शन में काम करेगा, लेकिन बाद में उन्हें महसूस हुआ कि वहां स्थिति वैसी नहीं थी, जैसी उन्हें समझाई गई थी। कासिम सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा गया था। उस समय उन्हें यह बताया गया था कि उनके हस्ताक्षर और संबंधित दस्तावेज ममता बनर्जी तक पहुंचाए जाएंगे। लेकिन जब वह उस गुट के कामकाज से जुड़े, तो उन्हें महसूस हुआ कि वहां ममता बनर्जी की भूमिका या उनके नेतृत्व का कोई उल्लेख नहीं था। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी उनके लिए ‘दीदी’ हैं और वह किसी भी परिस्थिति में उनका साथ नहीं छोड़ सकते। कासिम सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें बताया गया था कि ममता बनर्जी सभी के ऊपर रहेंगी और यही बात उन्हें तथा अन्य लोगों को भी समझाई गई थी। लेकिन जब उन्हें लगा कि उस व्यवस्था में ममता बनर्जी को शामिल नहीं किया गया है, तो उन्होंने उस गुट में बने रहने का कोई कारण नहीं देखा। विधायक ने कहा कि ममता बनर्जी ही वह नेता हैं, जिन्होंने उन्हें राजनीतिक पहचान दी और विधानसभा तक पहुंचने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें चुनाव का टिकट दिया और वह ममता बनर्जी की तस्वीर और पार्टी के नाम पर जनता के बीच वोट मांगने गए थे। जनता ने भी तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा करते हुए उन्हें समर्थन दिया। कासिम सिद्दीकी ने कहा कि इसी कारण वह ममता बनर्जी के साथ पहले भी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। उनकी वापसी को तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में पार्टी के भीतर नेतृत्व और विधानसभा से जुड़े मुद्दों को लेकर पहले से ही राजनीतिक खींचतान चल रही है। कासिम सिद्दीकी को ‘पीरजादा’ के नाम से भी जाना जाता है। उनका संबंध हुगली जिले के फुरफुरा शरीफ दरगाह से बताया जाता है और मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों में उनका प्रभाव माना जाता है। वह पिछले वर्ष तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। बाद में उन्हें पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दी गई और उन्हें अमदंगा विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया, जहां उन्होंने चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। उनकी वापसी ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेतृत्व और राजनीतिक समीकरणों को लेकर विवाद बना हुआ है। बागी गुट ने इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी है और सदन में बहुमत परीक्षण कराने की मांग की है। इस बीच तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी बागी गुट को चुनौती स्वीकार करने की बात कही गई है। पार्टी विधायक कुणाल घोष ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का फैसला अस्थायी था और अस्थायी व्यवस्था को स्थायी नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि बहुमत परीक्षण की बात हो रही है तो तृणमूल कांग्रेस इसके लिए तैयार है। कुणाल घोष ने यह भी कहा कि यदि बहुमत परीक्षण कराया जाता है तो वह गुप्त मतदान के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने बागी गुट पर राज्य सरकार के कथित समर्थन से तृणमूल कांग्रेस को कमजोर करने और पार्टी को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया। कासिम सिद्दीकी की वापसी के बाद अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या अन्य बागी नेता भी आने वाले दिनों में ममता बनर्जी के खेमे में लौट सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी राजनीतिक खींचतान के बीच उनकी ‘घर वापसी’ को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल कासिम सिद्दीकी ने साफ कर दिया है कि उनकी राजनीतिक निष्ठा ममता बनर्जी के साथ है। दूसरी ओर, बागी गुट और तृणमूल कांग्रेस के बीच बहुमत परीक्षण तथा विधानसभा में नेतृत्व को लेकर जारी विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कासिम सिद्दीकी की वापसी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में क्या नए समीकरण बनते हैं और पार्टी के भीतर जारी सियासी संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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