August 25, 2026

पटना की सड़कों पर छात्रों का आंदोलन, हाथों में तिरंगा लेकर निकले, पुलिस ने चलाया वाटर कैनन

  • टीआरई-4 में प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के विरोध समेत तीन प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन, मुख्यमंत्री आवास घेरने निकले छात्रों को डाकबंगला पर रोका गया
  • जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े प्रदर्शनकारी, पुलिस से धक्का-मुक्की; मुख्यमंत्री ने विद्यार्थी सहयोग शिविर के जरिए समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया

पटना। बिहार में चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर छात्रों का आंदोलन मंगलवार को सड़कों पर पहुंच गया। पटना के गर्दनीबाग में 18 अगस्त से धरना दे रहे अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले। हाथों में तिरंगा और मांगों से जुड़े पोस्टर लेकर बड़ी संख्या में छात्र गांधी मैदान की ओर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए जेपी गोलंबर और डाकबंगला चौराहे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। छात्रों की प्रमुख मांगों में शिक्षक भर्ती परीक्षा के दो चरणों यानी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की व्यवस्था खत्म कर एक ही चरण में परीक्षा कराना, गलत उत्तर के लिए अंक काटने की व्यवस्था हटाना और बिहार के अभ्यर्थियों के लिए शत-प्रतिशत स्थानीय निवास नीति लागू करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन मांगों पर सरकार को स्पष्ट फैसला लेना चाहिए।
जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग तोड़ आगे बढ़े छात्र
मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रहे छात्रों को रोकने के लिए जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग की गई थी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल समेत बड़ी संख्या में सुरक्षा जवानों को तैनात किया गया। पुलिस की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी निर्धारित स्थान से आगे न बढ़ें, लेकिन छात्रों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश शुरू कर दी। देखते ही देखते छात्रों और सुरक्षाकर्मियों के बीच तनातनी बढ़ गई। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और उसे तोड़कर आगे बढ़ने लगे। इसके बाद छात्र डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कई स्तरों पर सुरक्षा घेरा बनाया।
डाकबंगला पर पानी की बौछार
डाकबंगला चौराहे पर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लोहे की शील्ड से बैरिकेडिंग की गई थी। छात्र लगातार इसे पार करने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की तेज बौछार करने वाली मशीन का इस्तेमाल किया। पानी की बौछार के बीच भी कई छात्र तिरंगा हाथ में लेकर प्रदर्शन करते नजर आए। इसी दौरान एक छात्रा के बेहोश होने की भी जानकारी सामने आई।
प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर हटाने की कार्रवाई
डाकबंगला चौराहे पर पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर वहां से हटाने की कोशिश की। कुछ छात्रों को बसों में बैठाया गया। प्रदर्शनकारी लगातार मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग कर रहे थे। एक अनशनकारी छात्र ने सवाल उठाया कि जब वह अपनी समस्याएं लेकर मुख्यमंत्री से मिलना चाहता है तो उसे मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा। छात्रों का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।
छात्रों ने सरकार पर लगाया आंदोलन में फूट डालने का आरोप
प्रदर्शन में शामिल छात्र मनोज कुमार चंद्रवंशी ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों को स्वीकार करने के बजाय आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उनका दावा था कि एक दिन पहले शिक्षा विभाग के सचिव और पटना के जिलाधिकारी से बातचीत हुई थी और उन्हें बताया गया था कि छात्र गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। छात्र नेता ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन में फूट डालने की कोशिश कर रही है और कोचिंग संस्थानों के छात्रों को भी कथित तौर पर धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्र मुख्यमंत्री से मिलकर ही अपनी बात रखेंगे।
मुख्यमंत्री ने समाधान का दिया भरोसा
छात्रों के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामाजिक माध्यम पर संदेश जारी कर विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि उनकी आवाज सुनी जाएगी। उन्होंने विद्यार्थी सहयोग शिविर की जानकारी देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं, शिकायतों और सुझावों के समाधान के लिए व्यवस्था शुरू की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, हर महीने चौथे मंगलवार को शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इनमें विद्यार्थी अपनी समस्याएं सीधे सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। इसके अलावा विद्यार्थी सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन 1100 के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने और उसकी स्थिति जानने की व्यवस्था की गई है।
शिक्षा मंत्री ने कहा- मांगों का समाधान हो चुका
वहीं शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने आंदोलन को लेकर कहा कि छात्रों ने जिन मुद्दों को लेकर धरना शुरू किया था, सरकार की ओर से उन पर समाधान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समय पर समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर अभी स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ है। यही वजह है कि गर्दनीबाग से शुरू हुआ आंदोलन मंगलवार को राजधानी की सड़कों तक पहुंच गया।
अब सरकार और छात्रों के बीच संवाद पर नजर
टीआरई-4 को लेकर छात्रों और सरकार के बीच गतिरोध फिलहाल पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान के लिए नई व्यवस्था शुरू करने का दावा कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली और स्थानीय निवास नीति समेत अपनी मांगों पर लिखित एवं स्पष्ट निर्णय चाहते हैं। मंगलवार के प्रदर्शन में बैरिकेडिंग टूटने, पुलिस से धक्का-मुक्की और पानी की बौछार के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। अब सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच बातचीत के जरिए रास्ता निकले, ताकि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया भी आगे बढ़े और अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर बना गतिरोध भी समाप्त हो सके।

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