छात्र आंदोलन के बीच सीएम सम्राट का बड़ा भरोसा, बोले- हर बात सुनी जाएगी, समस्याओं का होगा समाधान
- टीआरई-4 की परीक्षा व्यवस्था और आरक्षण को लेकर गर्दनीबाग में जारी है अभ्यर्थियों का धरना
- मुख्यमंत्री ने शुरू किया ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’, पोर्टल और हेल्पलाइन के जरिए शिकायत दर्ज कराने की सुविधा
पटना। बिहार में चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। पटना के गर्दनीबाग में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार उनकी बात सुनेगी और समस्याओं के समाधान की दिशा में जरूरी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री ने सामाजिक माध्यम एक्स पर पोस्ट कर कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं, शिकायतों और सुझावों के त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के लिए सरकार ने ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों की हर बात सुनी जाए और उनकी समस्याओं का समाधान हो, यही सरकार का संकल्प है। सरकार की ओर से शुरू की गई नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को अपनी शिकायतें सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
टीआरई-4 को लेकर तीन प्रमुख मांगें
गर्दनीबाग में चल रहे आंदोलन का मुख्य मुद्दा बिहार लोक सेवा आयोग की चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी परीक्षा की प्रक्रिया में कई बदलाव की मांग कर रहे हैं। इनमें प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा की व्यवस्था खत्म कर एकल चरण में परीक्षा कराने की मांग प्रमुख है। इसके अलावा अभ्यर्थी परीक्षा में नकारात्मक अंक व्यवस्था खत्म करने और बिहार के अभ्यर्थियों के लिए शत-प्रतिशत स्थानीय निवासी नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर अभ्यर्थी 18 अगस्त से गर्दनीबाग में धरने पर बैठे हैं।
मुख्यमंत्री आवास घेराव की तैयारी
मंगलवार को प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च निकालने की तैयारी की गई। इस मार्च को देखते हुए प्रशासन ने पटना में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। जेपी गोलंबर पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया। डाकबंगला चौराहे पर भी पुलिस ने विशेष तैयारी की। यहां लोहे की सुरक्षा ढाल लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की व्यवस्था की गई। प्रशासन की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो तथा प्रदर्शनकारियों को निर्धारित क्षेत्र में ही रोका जा सके।
छात्र संगठनों में भी मतभेद
छात्रों के प्रस्तावित मार्च को लेकर सभी छात्र संगठन एकमत नहीं हैं। यह मार्च ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन के अमन गुट की ओर से निकाले जाने की बात कही गई। वहीं छात्र नेता दिलीप कुमार ने इस मार्च का समर्थन नहीं किया है। छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन को भी इस कार्यक्रम से अलग रखा गया है। ऐसे में शिक्षक भर्ती को लेकर छात्रों का आंदोलन व्यापक होने के बावजूद अलग-अलग छात्र संगठनों की रणनीति अलग दिखाई दे रही है। सरकार के सामने भी छात्रों की मांगों पर संवाद कायम रखने और आंदोलन को नियंत्रित तरीके से संभालने की चुनौती बनी हुई है।
हर महीने लगेगा विद्यार्थी सहयोग शिविर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में बताया कि ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ हर महीने के चौथे मंगलवार को शिक्षण संस्थानों में आयोजित किया जाएगा। इन शिविरों में विद्यार्थी अपनी समस्याएं, शिकायतें और सुझाव सीधे सरकार तथा संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना बताया गया है। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को शिकायतों के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याएं संबंधित विभाग तक सीधे पहुंच सकें।
पोर्टल और हेल्पलाइन से भी शिकायत की सुविधा
सरकार ने विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन शिकायत की व्यवस्था भी शुरू करने की बात कही है। ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ के माध्यम से छात्र अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। इसके साथ ही हेल्पलाइन 1100 के जरिए भी अपनी समस्या सरकार तक पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। खास बात यह है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद विद्यार्थी उसकी स्थिति की जानकारी भी ले सकेंगे। इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की गई है।
अब सरकार के अगले कदम पर नजर
मुख्यमंत्री के भरोसे के बावजूद गर्दनीबाग में आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें अभी बनी हुई हैं। छात्र चाहते हैं कि शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया, नकारात्मक अंक व्यवस्था और स्थानीय निवासी नीति को लेकर सरकार तथा संबंधित आयोग स्पष्ट निर्णय लें। सरकार की ओर से संवाद और शिकायत समाधान की नई व्यवस्था शुरू किए जाने के बाद अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि उनकी भर्ती परीक्षा से जुड़ी मांगों पर क्या फैसला लिया जाता है। फिलहाल आंदोलन, प्रशासन की सुरक्षा तैयारी और मुख्यमंत्री के आश्वासन के बीच बिहार में शिक्षक भर्ती को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज बनी हुई है।


