बिहार में अब मिड-डे मील का बनेगा रिपोर्ट कार्ड, होगी सख्त निगरानी, शिक्षा विभाग का निर्देश जारी
पटना। बिहार के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य भर में संचालित केंद्रीकृत रसोई घरों की स्वतंत्र जांच प्रतिष्ठित शोध संस्था एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा की जाएगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग के मध्याह्न भोजन निदेशालय और आद्री के बीच एक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जिसके तहत अगले तीन वर्षों तक राज्य के सभी 38 जिलों में संचालित केंद्रीकृत रसोई घरों का नियमित और औचक निरीक्षण किया जाएगा। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मध्याह्न भोजन योजना को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। राज्य में वर्तमान में 100 से अधिक केंद्रीकृत रसोई घर विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जो लाखों बच्चों के लिए भोजन तैयार करते हैं। इन सभी रसोई घरों की कार्यप्रणाली, भोजन की गुणवत्ता और वितरण व्यवस्था का विस्तृत मूल्यांकन आद्री की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया जाएगा। समझौते के तहत आद्री की टीम भोजन की गुणवत्ता, पोषण मानकों, साफ-सफाई, खाद्य सामग्री के भंडारण, भोजन पकाने की प्रक्रिया और वितरण प्रणाली का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण करेगी। यह मूल्यांकन केवल औपचारिक जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके लिए आधुनिक डेटा संग्रह और विश्लेषण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। निरीक्षण के बाद आद्री द्वारा प्रत्येक रसोई घर का विस्तृत रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें उनकी कार्यप्रणाली का वस्तुनिष्ठ आकलन होगा। इसके अलावा, मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य के लगभग पांच प्रतिशत स्कूलों का चयन यादृच्छिक आधार पर किया जाएगा। इन विद्यालयों में यह जांच की जाएगी कि रसोई घर से निकलने वाला भोजन बच्चों तक पहुंचते-पहुंचते अपनी गुणवत्ता, पोषण स्तर और स्वच्छता बनाए रखता है या नहीं। इस दौरान आद्री की टीम विद्यालयों का दौरा कर बच्चों, शिक्षकों और रसोइयों से सीधे बातचीत करेगी और भोजन की गुणवत्ता, मात्रा, स्वाद और समय पर उपलब्धता के बारे में फीडबैक प्राप्त करेगी। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आद्री द्वारा तैयार रिपोर्ट के आधार पर संबंधित गैर-सरकारी संगठनों को रेटिंग दी जाएगी। यह रेटिंग उत्कृष्ट, संतोषजनक, सुधार योग्य और अत्यंत खराब जैसी श्रेणियों में हो सकती है। जिन संगठनों का प्रदर्शन खराब पाया जाएगा, उन्हें सुधार के लिए निर्धारित समय दिया जाएगा। यदि इसके बावजूद सुधार नहीं होता है, तो उनका अनुबंध समाप्त कर दिया जाएगा। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले संगठनों को प्रोत्साहित किया जाएगा और उनके अनुबंध को आगे बढ़ाया जा सकता है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस पहल से मध्याह्न भोजन योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इससे गैर-सरकारी संगठनों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी विकसित होगी, जिससे बच्चों को बेहतर गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। विभाग के अनुसार, इस तरह की स्वतंत्र और नियमित जांच से योजना में मौजूद कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्याह्न भोजन योजना बच्चों के पोषण और शिक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलने से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और विद्यालयों में उनकी उपस्थिति भी बढ़ती है। ऐसे में इस योजना की प्रभावी निगरानी अत्यंत आवश्यक है। शिक्षा विभाग ने उम्मीद जताई है कि आद्री द्वारा किया जाने वाला यह स्वतंत्र मूल्यांकन राज्य में मध्याह्न भोजन योजना को और अधिक मजबूत बनाएगा। यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होगी। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है, तो यह अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल साबित हो सकती है।


