पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में शिक्षा और शोध सुधार के बड़े फैसले, परीक्षा प्रणाली में बदलाव लागू
- स्नातक पाठ्यक्रम में ओएमआर आधारित परीक्षा, संबद्धता के लिए एनओसी अनिवार्य
- पीएचडी प्रक्रिया में पारदर्शिता के उपाय, छात्रों के लिए नई फैलोशिप और अवसर
पटना। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद की बैठक में गुरुवार को शिक्षा, परीक्षा और शोध से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इन फैसलों का उद्देश्य विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाना और शोध कार्यों को अधिक विश्वसनीय बनाना है। बैठक में सबसे अहम निर्णय स्नातक चार वर्षीय पाठ्यक्रम के तहत परीक्षा प्रणाली में बदलाव को लेकर लिया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप संचालित पाठ्यक्रम में अब एईसी, एसईसी और वीएसी विषयों की परीक्षाएं ऑप्टिकल मार्क रीडर यानी ओएमआर शीट के माध्यम से ली जाएंगी। इस नई व्यवस्था से मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज और निष्पक्ष बनाने की उम्मीद जताई गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे परीक्षा परिणामों में पारदर्शिता आएगी और समय की बचत भी होगी। संबद्धता प्रक्रिया को लेकर भी परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। अब किसी भी कॉलेज को विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त करने से पहले अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी लेना अनिवार्य होगा। इस निर्णय का उद्देश्य बिना मानकों के तेजी से बढ़ रहे कॉलेजों पर नियंत्रण करना और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है। प्रशासन का मानना है कि इससे संस्थानों के अनियंत्रित विस्तार पर रोक लगेगी। इसके अलावा कई महाविद्यालयों को स्वपोषित व्यवस्था के तहत नए विषय शुरू करने की अनुमति भी दी गई है। इनमें वनस्पति विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, भूगोल, इतिहास, संस्कृत, फारसी, मनोविज्ञान और वाणिज्य जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। इससे छात्रों को अपने ही क्षेत्र में विविध विषयों का अध्ययन करने का अवसर मिलेगा और उन्हें बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी। शोध कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी परिषद ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब पीएचडी मौखिक परीक्षा यानी वाइवा की ध्वनि और वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी गई है। इस निर्णय से शोध प्रक्रिया में निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही पीएचडी अधिसूचना में संशोधन, मगध विश्वविद्यालय से आए शोधार्थियों के कार्यकाल विस्तार और सभी शोधार्थियों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू करने का निर्णय भी लिया गया। विश्वविद्यालय ने छात्रों के समग्र विकास के लिए भी नई पहल की है। इसके तहत भारतीय स्टेट बैंक की यूथ फॉर इंडिया फैलोशिप के साथ समझौता ज्ञापन किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों को सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने, नवाचार करने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर मिलेगा। यह फैलोशिप 13 महीने की होगी, जिसमें चयनित छात्रों को प्रति माह 21 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। कार्यक्रम पूरा करने के बाद उन्हें 1.10 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी, जिससे वे अपने नए प्रोजेक्ट या पहल की शुरुआत कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के प्लेसमेंट प्रमुख डॉ. मोहम्मद अली ने कहा कि यह समझौता छात्रों के लिए नए अवसर लेकर आया है और विश्वविद्यालय का प्रयास है कि अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय रोजगार, प्रशिक्षण और कौशल विकास से जुड़े अवसरों को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। बैठक में प्रशासनिक स्तर पर भी कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। एएन कॉलेज, पटना की प्राचार्य प्रो. रेखा रानी का स्थानांतरण कर उन्हें आरआरएस कॉलेज, मोकामा भेजा गया है, जहां वे तत्काल प्रभाव से प्राचार्य का पद संभालेंगी। वहीं एएन कॉलेज में दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. शैलेश कुमार सिंह को अगले आदेश तक प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है और उन्हें सभी बैंक खातों के संचालन का अधिकार भी दिया गया है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय ने विदेशी छात्रों के लिए अलग पीएचडी नीति बनाने, डी.लिट कार्यक्रम शुरू करने और शोध सलाहकार परिषद सहित अन्य शोध समितियों के पुनर्गठन का अधिकार कुलपति को सौंप दिया है। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय द्वारा लिए गए ये निर्णय शिक्षा और शोध के क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं, जिससे छात्रों और शोधार्थियों को बेहतर अवसर और पारदर्शी व्यवस्था मिल सकेगी।


