August 12, 2026

कोसी एक्सप्रेस के डिब्बे में लगी आग, यात्रियों में मची अफरातफरी; समय रहते बुझाई गई लपटें

  • सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पहुंचते ही एम-2 कोच के नीचे से निकला धुआं और आग, रेलवे कर्मचारियों की तत्परता से टला बड़ा हादसा
  • यात्रियों को सुरक्षित दूसरे डिब्बों में किया गया स्थानांतरित, करीब 43 मिनट बाद ट्रेन पूर्णिया कोर्ट के लिए रवाना

सहरसा। पूर्व मध्य रेलवे के सहरसा-मानसी रेलखंड पर बुधवार सुबह कोसी एक्सप्रेस में आग लगने की घटना से यात्रियों में हड़कंप मच गया। हटिया से पूर्णिया कोर्ट जा रही ट्रेन संख्या 18625 के एम-2 कोच के नीचे से अचानक घना धुआं निकलने लगा और कुछ ही देर में आग की लपटें दिखाई देने लगीं। ट्रेन उस समय सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पहुंचने वाली थी। समय रहते धुआं देख लिए जाने और रेलवे कर्मचारियों की तत्परता के कारण बड़ा हादसा टल गया। घटना में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। आग पर काबू पाने के लिए पहले रेलवे के अग्निशमन यंत्रों का इस्तेमाल किया गया। जब इससे आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हुई तो दमकल विभाग को सूचना दी गई। कुछ ही समय में दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग को पूरी तरह बुझा दिया।
गेटमैन की नजर पड़ी तो खुली आग की जानकारी
जानकारी के अनुसार, कोसी एक्सप्रेस बुधवार सुबह रानीबाग ढाला के पास से गुजर रही थी। इसी दौरान वहां तैनात गेटमैन सुदीन कुमार की नजर ट्रेन के एम-2 कोच के नीचे से निकल रहे घने धुएं पर पड़ी। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल इसकी सूचना सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन अधीक्षक को दी। रेलवे कर्मचारियों को सूचना मिलते ही ट्रेन को स्टेशन पर पहुंचने के बाद प्लेटफॉर्म संख्या एक पर रोकने की तैयारी की गई। ट्रेन के रुकते ही एम-2 कोच के नीचे आग की लपटें भी दिखाई देने लगीं। इससे यात्रियों में अफरातफरी मच गई। कई यात्री घबराकर अपने सामान के साथ सुरक्षित स्थान की ओर जाने लगे।
अग्निशमन यंत्र से बुझाने की कोशिश
ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही रेलवे कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। कोच में उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग पर काबू पाने की कोशिश की गई। हालांकि आग पूरी तरह नहीं बुझ सकी, जिसके बाद दमकल विभाग को तत्काल सूचना दी गई। कुछ ही देर में दमकल की टीम सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पहुंची। टीम ने आवश्यक सावधानी के साथ आग बुझाने का अभियान शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद कोच के नीचे लगी आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। इस दौरान रेलवे कर्मचारियों ने यात्रियों को सुरक्षित निकालने पर भी विशेष ध्यान दिया।
यात्रियों को दूसरे डिब्बों में भेजा गया
एम-2 कोच में सवार यात्रियों को किसी तरह का जोखिम न हो, इसके लिए उन्हें तत्काल सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाद में सभी यात्रियों को ट्रेन के दूसरे डिब्बों में स्थानांतरित कर दिया गया। रेलवे कर्मचारियों ने कोच और उसके आसपास के हिस्से की सुरक्षा जांच भी की। आग बुझने के बाद रेलवे अधिकारियों ने ट्रेन की तकनीकी स्थिति की जांच की। आवश्यक सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही ट्रेन को आगे रवाना किया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान ट्रेन स्टेशन पर करीब 43 मिनट तक खड़ी रही।
करीब 43 मिनट रुकी रही ट्रेन
रेलवे के अनुसार, कोसी एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से करीब एक घंटे की देरी से सुबह 5:30 बजे सिमरीबख्तियारपुर स्टेशन पहुंची थी। आग की घटना के बाद सुरक्षा और जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए ट्रेन को प्लेटफॉर्म पर रोका गया। करीब 43 मिनट तक खड़े रहने के बाद सुबह 6:13 बजे ट्रेन को आगे के लिए रवाना कर दिया गया। ट्रेन के रवाना होने के बाद यात्रियों ने भी राहत की सांस ली। घटना के कारण कुछ समय के लिए स्टेशन पर अफरातफरी का माहौल रहा, लेकिन किसी यात्री के घायल होने की सूचना नहीं मिली।
ब्रेक में तकनीकी खराबी की आशंका
प्रारंभिक जांच में ट्रेन के एम-2 कोच के नीचे आग लगने की वजह ब्रेक बाइंडिंग होने की आशंका जताई जा रही है। ब्रेक बाइंडिंग की स्थिति में ब्रेक के हिस्सों में अत्यधिक घर्षण और गर्मी पैदा हो सकती है, जिससे आग लगने की संभावना रहती है। हालांकि रेलवे प्रशासन ने अभी इसे अंतिम कारण नहीं माना है। घटना की विस्तृत तकनीकी जांच की जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि आग किस वजह से लगी और इसके लिए किसी तकनीकी खराबी की भूमिका थी या नहीं।
समय रहते सूचना मिलने से टला बड़ा हादसा
कोसी एक्सप्रेस की इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ट्रेन के कोच में आग बढ़ने से पहले ही धुआं दिखाई दे गया। गेटमैन की सतर्कता और समय पर रेलवे अधिकारियों को सूचना दिए जाने से तत्काल कार्रवाई संभव हुई। स्टेशन पर ट्रेन रुकने के बाद यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और आग को भी समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। यदि धुआं और आग की जानकारी देर से मिलती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। रेलवे कर्मचारियों, दमकल कर्मियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों की तत्परता ने संभावित बड़े हादसे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेलवे प्रशासन अब घटना के तकनीकी कारणों की जांच कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

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