November 8, 2026

पांच लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार हुआ इंजीनियर, फ्लैट में खुला अकूत संपत्ति का राज! सात बैंक खाते, सोना-चांदी और निवेश के दस्तावेज बरामद

>>मधुबनी में सड़क निर्माण की 7.27 करोड़ की योजनाओं के भुगतान के एवज में मांगी थी 19.50 लाख की घूस, पटना के पॉश अपार्टमेंट में निगरानी की बड़ी कार्रवाई

 

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई में पथ निर्माण विभाग का एक कार्यपालक अभियंता पांच लाख रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। मधुबनी पथ प्रमंडल में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता रितेश चंद्र सिन्हा को निगरानी टीम ने रविवार को पटना के आशियाना स्थित शिव पार्वती गृह अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर सी-303 से दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद जब उसके फ्लैट की तलाशी ली गई तो वहां से बरामद नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और निवेश से जुड़े दस्तावेजों ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया।

 

मामला महज पांच लाख रुपये की रिश्वत तक सीमित नहीं दिख रहा। फ्लैट से 6 लाख 11 हजार 900 रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण, शेयर और एलआइसी में निवेश के कागजात, सात बैंक खातों के दस्तावेज, जमीन और फ्लैट से जुड़े कागजात तथा लॉकर की चाबी बरामद हुई है। अब निगरानी की जांच इन संपत्तियों और निवेश के स्रोत तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

 

7.27 करोड़ की सड़क योजनाएं और 19.50 लाख की रिश्वत!

 

निगरानी ब्यूरो के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत डेहरी ऑन सोन निवासी ठेकेदार अरुण कुमार सिंह की शिकायत से हुई। परिवादी का मधुबनी जिले के राजनगर और बाबूबरही इलाके में सड़क निर्माण का काम चल रहा था। दोनों योजनाओं की कुल निर्माण राशि करीब 7 करोड़ 27 लाख रुपये बताई गई है।

 

आरोप है कि इन योजनाओं के बकाया भुगतान और कार्य से संबंधित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने के बदले कार्यपालक अभियंता ने ठेकेदार से तीन प्रतिशत कमीशन के हिसाब से कुल 19 लाख 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी। तत्काल पांच लाख रुपये देने का दबाव बनाया जा रहा था।

 

सरकारी विभाग में जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी पर रिश्वतखोरी के इस आरोप ने एक बार फिर निर्माण कार्यों के भुगतान में कथित कमीशनखोरी के खेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

शिकायत की पुष्टि होते ही बिछाया गया जाल

 

ठेकेदार ने रिश्वत की मांग से परेशान होकर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई। ब्यूरो ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पहले उसका सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद निगरानी टीम ने गिरफ्तारी की पूरी रणनीति तैयार की।

 

रविवार को जैसे ही कार्यपालक अभियंता ने पांच लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार की, पहले से घात लगाए निगरानी अधिकारियों ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। कार्रवाई इतनी सटीक थी कि आरोपी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

 

फ्लैट में मिले सात बैंक खातों के दस्तावेज, लॉकर की चाबी ने बढ़ाई जांच

 

गिरफ्तारी के बाद निगरानी टीम ने आरोपी के आशियाना स्थित फ्लैट की तलाशी ली। तलाशी के दौरान 6,11,900 रुपये नकद के अतिरिक्त सोने-चांदी के आभूषण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले।

 

बरामद दस्तावेजों में सात बैंक खातों से संबंधित कागजात, शेयर बाजार और एलआइसी में निवेश के प्रमाण, जमीन तथा फ्लैट की खरीद से जुड़े दस्तावेज और लॉकर की चाबी शामिल हैं। इन बरामदगियों के बाद अब जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आरोपी अधिकारी की कुल चल-अचल संपत्ति कितनी है और उसका ज्ञात आय के स्रोतों से कितना संबंध है।

 

अब आय से अधिक संपत्ति की भी खुल सकती है परत!

 

पांच लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तारी के बाद कार्यपालक अभियंता की संपत्ति और वित्तीय लेन-देन निगरानी ब्यूरो की जांच के केंद्र में आ गए हैं। सात बैंक खातों, निवेश के दस्तावेजों, जमीन और फ्लैट के कागजात तथा लॉकर की चाबी की जांच से संपत्ति का वास्तविक ब्योरा सामने आ सकता है।

 

फिलहाल निगरानी ब्यूरो मामले की विस्तृत जांच कर रहा है। गिरफ्तार अभियंता को विशेष निगरानी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

 

सवाल बड़ा है—सड़क निर्माण की सरकारी योजनाओं में भुगतान के नाम पर कथित कमीशन वसूलने का यह मामला क्या सिर्फ एक अधिकारी तक सीमित है, या इसके पीछे भ्रष्टाचार का कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है? निगरानी की आगे की जांच से कई और परतें खुलने की उम्मीद है।

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