महिला रोजगार योजना को मिला नया विस्तार, दूसरी किस्त में महिलाओं को मिलेंगे 20 हजार रुपये
- करीब 40 लाख महिलाओं का सर्वे पूरा, सफल रोजगार चलाने वालों को मिलेगा लाभ
- पांच चरणों में दी जाएगी सहायता राशि, स्वरोजगार से महिलाओं की बढ़ रही आय
पटना। बिहार में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को अब और गति मिल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई इस पहल को वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आगे बढ़ा रहे हैं। योजना के तहत अब महिलाओं को दूसरी किस्त के रूप में 20-20 हजार रुपये देने की तैयारी तेज कर दी गई है। इससे बड़ी संख्या में महिलाएं अपने स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में सक्षम होंगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, योजना के तहत पहली किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये प्राप्त करने वाली लगभग 40 लाख महिलाओं का सर्वेक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है। इस सर्वेक्षण में यह आकलन किया गया कि किन महिलाओं ने प्राप्त राशि का उपयोग कर अपना रोजगार शुरू किया और उसका संचालन किस स्तर पर हो रहा है। सर्वे के निष्कर्षों के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत महिलाओं ने इस राशि का उपयोग कर सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय शुरू कर लिया है। जीविका समूह के माध्यम से संचालित इस योजना के तहत राज्य की लगभग 1 करोड़ 81 लाख महिलाओं को पहले ही पहली किस्त का लाभ दिया जा चुका है। अब जिन महिलाओं का व्यवसाय सुचारु रूप से चल रहा है, उन्हें दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, दूसरी किस्त प्राप्त करने के लिए लाभार्थियों को 5 हजार रुपये का अंशदान भी करना होगा। यह योजना केवल एक बार की सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कुल पांच चरणों में आर्थिक सहयोग प्रदान करने का प्रावधान है। पहली किस्त 10 हजार रुपये के रूप में दी जा चुकी है। दूसरी किस्त में 20 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके बाद तीसरी और चौथी किस्त में क्रमशः 40 हजार और 80 हजार रुपये दिए जाएंगे, जिसमें लाभार्थी को 10 हजार और 20 हजार रुपये का अंशदान करना होगा। अंतिम और पांचवीं किस्त में 60 हजार रुपये दिए जाएंगे, जिसमें किसी प्रकार का अंशदान नहीं लिया जाएगा। इस प्रकार कुल मिलाकर योजना के तहत महिलाओं को दो लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सर्वेक्षण के दौरान यह भी सामने आया है कि महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में अपने रोजगार की शुरुआत की है। बड़ी संख्या में महिलाओं ने पशुपालन को अपनाया है, जिसमें गाय, बकरी और मुर्गी पालन प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा कई महिलाओं ने फल-सब्जी की दुकान, किराना स्टोर, सिलाई-कढ़ाई का काम, चाय-पकौड़े की दुकान और ब्यूटी पार्लर जैसे छोटे व्यवसाय भी शुरू किए हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे सर्वेक्षण का कार्य पूरा होता जाएगा, वैसे-वैसे पात्र महिलाओं के खातों में दूसरी किस्त की राशि भेजी जाएगी। योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से सशक्त करना है। राज्य सरकार की इस पहल को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी योगदान दे सकेंगी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना बिहार में महिला सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। आने वाले समय में इस योजना के सकारात्मक परिणाम और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की उम्मीद है, जिससे राज्य की लाखों महिलाओं के जीवन में स्थायी बदलाव आ सकेगा।


