पेट्रोल-डीजल संकट के बीच पटना में बढ़ी सीएनजी की मांग, दो महीने में 30 प्रतिशत तक उछाल
- महंगे ईंधन से लोग कर रहे सीएनजी वाहनों की ओर रुख, पटना में तेजी से बढ़ रहा गैस नेटवर्क
- गेल इंडिया ने शुरू किया विस्तार अभियान, जून में तीन नए सीएनजी स्टेशन होंगे चालू
पटना। पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच राजधानी पटना में अब लोग तेजी से सीएनजी यानी संपीड़ित प्राकृतिक गैस आधारित वाहनों की ओर रुख कर रहे हैं। महंगे ईंधन और बढ़ते परिवहन खर्च के कारण सीएनजी की मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। स्थिति यह है कि पिछले दो महीनों में पटना में सीएनजी की खपत लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। आंकड़ों के अनुसार मार्च महीने में राजधानी में प्रतिदिन करीब एक लाख 10 हजार किलोग्राम सीएनजी की खपत हो रही थी। वहीं अप्रैल और मई में यह आंकड़ा बढ़कर करीब एक लाख 43 हजार किलोग्राम प्रतिदिन तक पहुंच गया। यह वृद्धि साफ तौर पर दर्शाती है कि लोग अब पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ते और पर्यावरण अनुकूल ईंधन को प्राथमिकता दे रहे हैं। पटना नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान समय में नौ सीएनजी स्टेशन संचालित हो रहे हैं। वहीं राजधानी में सीएनजी से चलने वाले वाहनों की संख्या करीब 16 हजार बताई जा रही है। यदि पूरे पटना जिले की बात करें तो यहां कुल 34 सीएनजी स्टेशन हैं और सीएनजी आधारित वाहनों की संख्या 41 हजार से अधिक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों ने लोगों को वैकल्पिक ईंधन की ओर आकर्षित किया है। खासकर टैक्सी चालकों, ऑटो चालकों और निजी वाहन मालिकों के बीच सीएनजी वाहनों की मांग तेजी से बढ़ी है। इससे न केवल ईंधन खर्च कम हो रहा है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिल रही है। सीएनजी की बढ़ती मांग को देखते हुए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी गेल इंडिया ने पटना जिले में गैस नेटवर्क विस्तार की योजना तेज कर दी है। कंपनी ने पिछले तीन वर्षों में जिले में 30 नए सीएनजी स्टेशन स्थापित किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जून महीने में तीन और नए सीएनजी स्टेशन शुरू किए जाएंगे, जिससे लोगों को और अधिक सुविधा मिल सकेगी। पटना जिले में पिछले दो महीनों के दौरान करीब एक हजार नए सीएनजी वाहन बिके हैं। इनमें चार पहिया वाहन, टैक्सी और ऑटो रिक्शा शामिल हैं। वाहन एजेंसियों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण अब अधिकतर ग्राहक सीएनजी मॉडल को प्राथमिकता दे रहे हैं। राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में सीएनजी स्टेशन संचालित हो रहे हैं। इनमें फ्रेजर रोड, बहादुरपुर गुमटी, फुलवारी, परसा बाजार, दीघा, बेली रोड, रुकनपुरा, गोला रोड, सगुना मोड़, भीखाचक, जीरो माइल, टोल प्लाजा, दीदारगंज, मनेर, बिहटा, मसौढ़ी, नौबतपुर, बिक्रम और खुसरूपुर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इधर, पटना के ट्रांसपोर्ट नगर में शहर का दूसरा सीएनजी मदर स्टेशन भी चालू कर दिया गया है। इससे पहले गर्दनीबाग में पहला मदर स्टेशन पहले से संचालित हो रहा था। इन दोनों मदर स्टेशनों से प्रतिदिन लगभग 30 सीएनजी स्टेशनों तक गैस की आपूर्ति की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर स्थित नए मदर स्टेशन की क्षमता काफी अधिक है। यहां प्रतिदिन तीन हजार से चार हजार वाहनों में गैस भरने की सुविधा उपलब्ध है। इससे राजधानी में गैस आपूर्ति की व्यवस्था और मजबूत होगी तथा सीएनजी स्टेशनों पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आने की उम्मीद है। परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसी प्रकार सीएनजी नेटवर्क का विस्तार होता रहा तो आने वाले समय में राजधानी में डीजल और पेट्रोल पर निर्भरता कम हो सकती है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। सीएनजी वाहन चालकों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की तुलना में सीएनजी काफी सस्ती पड़ती है। एक ओर जहां पारंपरिक ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं सीएनजी अपेक्षाकृत सस्ता और किफायती विकल्प बनकर उभरा है। हालांकि बढ़ती मांग के कारण कई सीएनजी स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतारें भी देखने को मिल रही हैं। सुबह और शाम के समय स्थिति और अधिक व्यस्त हो जाती है। इसे देखते हुए प्रशासन और संबंधित कंपनियां नए स्टेशन खोलने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में बिहार के अन्य जिलों में भी सीएनजी नेटवर्क का विस्तार होगा। सरकार और गैस कंपनियों का लक्ष्य स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और लोगों को सस्ता परिवहन विकल्प उपलब्ध कराना है। राजधानी पटना में सीएनजी की बढ़ती मांग इसी बदलती सोच और जरूरत का संकेत मानी जा रही है।


