दुनिया में अब 24 घंटे से अधिक हो रहा दिन का समय, रिसर्च में वैज्ञानिकों ने किये कई बड़े दावे

नई दिल्ली। हम सब जानते हैं कि दिन और रात मिलकर 24 घंटे का एक पूरा दिन बनाते हैं। परन्तु वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर दिन की अवधि को लेकर एक महत्वपूर्ण दावा किया है। एक शोध के अनुसार, पृथ्वी के आंतरिक कोर की घूर्णन गति लगातार कम हो रही है, जिसका असर पृथ्वी की घूर्णन गति पर पड़ रहा है और इसके परिणामस्वरूप दिन की लंबाई बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह प्रक्रिया 2010 से शुरू हुई है और अब दिन की अवधि पहले से अधिक हो गई है। शोधकर्ताओं के अनुसार, आंतरिक कोर की घूर्णन में परिवर्तन के कारण दिन 24 घंटे से भी अधिक लंबे हो सकते हैं। पृथ्वी का आंतरिक कोर एक ठोस स्फेयर की तरह है जो लोहे और निकेल से बना है। इसके चारों ओर पिघली हुई धातुएं बेहद गर्म और तरल अवस्था में हैं। पृथ्वी की तीन प्रमुख लेयरों में मैंटल और क्रस्ट शामिल हैं। वैज्ञानिकों को पृथ्वी के आंतरिक कोर के बारे में जानकारी सीस्मिक तरंगों के जरिए मिलती है, जो भूकंप के समय रिकॉर्ड किए गए कंपन से अध्ययन की जाती हैं। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहता है तो दिन की अवधि में सेकंड के हिस्से का अंतर आना शुरू हो जाएगा, जो लगातार बढ़ता रहेगा। शोध में शामिल प्रोफेसर जॉन विडाले ने कहा कि पहले जब उन्हें इस बारे में पता चला तो वह खुद अचंभित रह गए थे। लेकिन जब दो दर्जन ऐसे ही सिग्नल और पाए गए, तो यकीन हो गया कि आंतरिक कोर में परिवर्तन हो रहा है। कई दशकों बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब आंतरिक कोर की घूर्णन गति में परिवर्तन पाया गया है। पृथ्वी के आंतरिक कोर को लेकर वैज्ञानिकों में कई तरह की बहस चलती रहती है। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पृथ्वी की घूर्णन गति से ज्यादा तेजी से घूमता है, जबकि कुछ का कहना है कि मैग्नेटिक फील्ड की वजह से इसका घूर्णन पृथ्वी की घूर्णन गति से कम होता है। हालांकि, इस बात से कोई इनकार नहीं करता कि आंतरिक कोर से बैकट्रैकिंग होती है और इसका असर पृथ्वी की घूर्णन गति पर पड़ता है। 40 साल में पहली बार पाया गया है कि आंतरिक कोर की घूर्णन गति मैंटल से कम है। एक अन्य अध्ययन में कहा गया था कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से पहाड़ों के ग्लेशियर और अंटार्कटिका की बर्फ तेजी से पिघल रही है और इस कारण से भी पृथ्वी की घूर्णन गति धीमी हो रही है। इससे दिन लंबे होते जा रहे हैं। शोध में कहा गया था कि इस प्रभाव को कम करने के लिए पृथ्वी की तरल वाली लेयर भी धीमी हो रही है, जबकि ठोस लेयर की गति तेज हो गई है। 1972 के बाद से कुछ सालों में लीप सेकंड जोड़ने पड़े हैं, जिससे पता चलता है कि पृथ्वी हमेशा एक ही गति से नहीं घूमती है। वैज्ञानिक आंतरिक कोर की घूर्णन गति पर लगातार नजर रख रहे हैं। यह पृथ्वी का वह हिस्सा है जो 5500 डिग्री सेल्सियस तक गर्म रहता है और हमारे पैरों के नीचे करीब 3 हजार मील दूर है। इंसान चांद का सफर तो कर चुका है, लेकिन पृथ्वी के इस हिस्से तक पहुंचना अब भी नामुमकिन है।

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