बिहटा में एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र का सीएम ने किया उद्घाटन, युवाओं को मिलेगा रोजगार का नया अवसर
- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने किया शुभारंभ, चार अन्य जिलों में भी खुले विस्तार केंद्र
- अनुसूचित जाति और जनजाति उद्यमियों को बढ़ावा देने पर जोर, सरकारी खरीद में भागीदारी के लिए किया जाएगा सशक्त
पटना। बिहार के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत पटना जिले के बिहटा स्थित सिकंदरपुर गांव में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन मंगलवार को किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर, रोहतास, दरभंगा और मुंगेर में भी नए विस्तार केंद्रों की शुरुआत की गई। उद्घाटन से पहले दोनों नेताओं ने केंद्र परिसर में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और वहां प्रदर्शित तकनीकी सुविधाओं तथा योजनाओं की जानकारी ली। इन स्टॉलों के माध्यम से लघु उद्योगों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया गया है, जिससे नए उद्यमियों को मार्गदर्शन मिल सके। इस प्रौद्योगिकी केंद्र का मुख्य उद्देश्य राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ना और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करना है। विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मगही भाषा में कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयास से लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से इन केंद्रों की स्थापना की गई है। उन्होंने बताया कि बिहटा में बना यह केंद्र 171 करोड़ रुपये की लागत से 15 एकड़ भूमि में स्थापित किया गया है, जो राज्य का सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अलावा अन्य चार जिलों में बनाए गए विस्तार केंद्र लगभग 10-10 करोड़ रुपये की लागत से 15 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में विकसित किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लघु उद्योग रोजगार योजना के तहत कुल 12 स्टॉल बनाए गए हैं, जहां उद्यमिता से संबंधित विभिन्न जानकारियां दी जा रही हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को यह समझाया जाएगा कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे उठा सकते हैं और सरकारी खरीद प्रक्रिया में कैसे भाग ले सकते हैं। यह केंद्र राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति हब योजना के अंतर्गत स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य इन वर्गों के उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। इसके तहत उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार तक पहुंच प्रदान की जाएगी, ताकि वे प्रतिस्पर्धी वातावरण में सफल हो सकें। सरकारी नीतियों के अनुसार, विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को अपनी कुल खरीद का कम से कम चार प्रतिशत हिस्सा अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के उद्यमियों से करना अनिवार्य है। इस केंद्र के माध्यम से इन उद्यमियों को इस नीति का लाभ उठाने के लिए तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस पहल से बिहार के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और उन्हें अन्य राज्यों में पलायन करने की आवश्यकता कम होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रौद्योगिकी केंद्र न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाते हैं, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करते हैं। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। बिहटा में स्थापित यह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम प्रौद्योगिकी केंद्र बिहार के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आने वाले समय में यह केंद्र राज्य के युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकता है।


