केंद्र सरकार से 12 हजार करोड़ का लोन लगी बिहार सरकार, एक करोड़ लोगों को पेंशन राशि का होगा भुगतान

  • सीएम सम्राट चौधरी के सामने बड़ी परेशानी, आर्थिक दबाव में बिहार सरकार, पीएम से मुलाकात के बाद लगी मुहर
  • सामाजिक सुरक्षा पेंशन और विकास योजनाओं के लिए धन की जरूरत, पहली किस्त जल्द मिलने की उम्मीद
  • कैबिनेट और संगठन में बदलाव के संकेत, भारतीय जनता पार्टी में नए चेहरों को मौका मिलने की तैयारी

पटना। बिहार की नई सरकार आर्थिक दबाव से जूझ रही है और इससे उबरने के लिए उसने भारतीय रिजर्व बैंक से जून तक 12 हजार करोड़ रुपये के ऋण की मांग की है। जानकारी के अनुसार, इस राशि में से करीब 4 हजार करोड़ रुपये इसी महीने के अंत तक मिलने की संभावना है। सरकार इस धनराशि का उपयोग सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, लंबित भुगतान और विकास कार्यों को गति देने के लिए करना चाहती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद राजधानी दिल्ली का दौरा किया और वहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने सामाजिक माध्यम पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि राज्य के समग्र विकास और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार का सहयोग बिहार की प्रगति को नई दिशा देगा। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय भी पहुंचे, जहां उन्होंने संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में नितिन नवीन से भी उनकी संक्षिप्त बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर संभावित नामों पर चर्चा की गई। सरकार इस समय संकट प्रबंधन की स्थिति में काम कर रही है। प्रस्तावित ऋण का बड़ा हिस्सा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के भुगतान में खर्च किया जाएगा। मार्च और अप्रैल महीने की पेंशन अब तक लंबित है और सरकार की योजना है कि मई में एक करोड़ से अधिक बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं को दो महीने की पेंशन एक साथ दी जाए। इसके अलावा, वित्तीय संकट के कारण रुकी हुई विकास योजनाओं को भी इस ऋण के माध्यम से गति देने की तैयारी है। लगभग 58 हजार छात्रों के छात्र ऋण कार्ड के तहत भुगतान भी अटका हुआ है, जिसे मई से जारी करने की योजना बनाई जा रही है। वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण कई निर्माण कार्य भी प्रभावित हुए हैं, जिन्हें ऋण मिलने के बाद पुनः शुरू किया जाएगा। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया था, जिससे सरकार पर हर महीने करीब 1150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही महिला रोजगार योजना पर लगभग 15 हजार करोड़ रुपये खर्च होने से राज्य के खजाने पर दबाव और बढ़ गया है। वर्तमान में राज्य की कुल देनदारी 3.70 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है और वर्ष 2026 के अंत तक इसके 4 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचने की आशंका है। सरकार को इस वर्ष लगभग 40 हजार करोड़ रुपये केवल ब्याज के रूप में चुकाने हैं, जो प्रतिदिन 100 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है। हालांकि वित्त विभाग का कहना है कि यह स्थिति राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम की सीमा के भीतर है। इधर, राजनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज है। सूत्रों के अनुसार, पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। भारतीय जनता पार्टी के कोटे से मंत्रियों में लगभग 30 प्रतिशत बदलाव की संभावना जताई जा रही है। कुछ गैर-प्रदर्शनकारी नेताओं को हटाकर नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है। पार्टी संगठन में भी बदलाव की तैयारी चल रही है। प्रदेश स्तर पर महामंत्री और उपाध्यक्ष पदों पर नए चेहरों की नियुक्ति की संभावना है। संगठन में युवाओं, महिलाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई जा रही है। साथ ही पिछड़े वर्गों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। बिहार सरकार एक ओर जहां आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर भी बड़े बदलाव की तैयारी में है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार आर्थिक संकट से किस हद तक उबर पाती है और विकास कार्यों को किस गति से आगे बढ़ा पाती है।