ईंधन संकट से जूझता बांग्लादेश, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं ठप होने का खतरा

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से तेल आपूर्ति प्रभावित, पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें
  • बिजली कटौती और डीजल संकट से दूरसंचार सेवाएं खतरे में, अर्थव्यवस्था पर भी असर

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है, जिसका सबसे बड़ा प्रभाव ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहा है। दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संघर्ष के कारण कई देशों में ईंधन संकट गहराता जा रहा है। इस संकट का सबसे गंभीर असर भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है, जहां हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। बांग्लादेश, जिसकी आबादी लगभग 17 करोड़ है, अपनी तेल और गैस की जरूरतों का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है। इसमें से अधिकांश आपूर्ति मध्य पूर्व देशों से होती है। लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण तेल की आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे देश में व्यापक ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है। राजधानी ढाका सहित कई बड़े शहरों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग घंटों तक ईंधन के लिए इंतजार कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में सरकार ने डीजल की कीमतों में 15 प्रतिशत तक की वृद्धि की है, लेकिन इसका असर आम जनता पर और अधिक दबाव के रूप में सामने आ रहा है। ऊर्जा संकट का प्रभाव केवल परिवहन या घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर उद्योगों और सेवाओं पर भी पड़ रहा है। विशेष रूप से देश का प्रमुख रेडीमेड गारमेंट उद्योग, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, पहले से ही बिजली संकट के कारण प्रभावित है। उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निर्यात और रोजगार पर भी असर पड़ा है। अब इस संकट की आंच दूरसंचार क्षेत्र तक पहुंच गई है। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश के मोबाइल दूरसंचार संचालकों के संगठन एएमटीओबी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं। संगठन ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। दूरसंचार कंपनियां बिजली कटौती के दौरान अपने डेटा केंद्रों और नेटवर्क टावरों को चलाने के लिए डीजल जनरेटर पर निर्भर रहती हैं। लेकिन मौजूदा स्थिति में प्रतिदिन 5 से 8 घंटे की बिजली कटौती हो रही है, जिससे डीजल की खपत तेजी से बढ़ गई है। एएमटीओबी के अनुसार, केवल डेटा केंद्र ही हर घंटे 500 से 600 लीटर डीजल की खपत करते हैं, जो वर्तमान संकट के बीच एक बड़ी चुनौती बन गई है। संगठन के महासचिव मोहम्मद जुल्फिकार ने कहा है कि डेटा केंद्र किसी भी नेटवर्क का मस्तिष्क होते हैं। यदि ये बंद हो गए, तो पूरा संचार तंत्र ठप हो जाएगा। इससे न केवल कॉल और इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होंगी, बल्कि संदेश सेवा और बैंकिंग सेवाएं भी बाधित हो सकती हैं। बांग्लादेश में मोबाइल वित्तीय सेवाएं आम लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा हैं। छोटे लेन-देन से लेकर बड़े भुगतान तक, बड़ी संख्या में लोग इन सेवाओं पर निर्भर हैं। यदि नेटवर्क सेवाएं बाधित होती हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव का प्रभाव अब क्षेत्रीय संकट के रूप में सामने आ रहा है। बांग्लादेश जैसे देश, जो ऊर्जा के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर हैं, इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। यदि जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह संकट और गहरा सकता है और इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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