सुपौल में सड़कों पर अवैध अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर, हटाई गई दर्जनों दुकानें, पुलिस और भीड़ में नोक-झोक
सुपौल। सुपौल शहर के व्यस्त लोहियानगर चौक पर शुक्रवार को प्रशासन ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान चलाते हुए सड़क किनारे लगी दर्जनों फल और सब्जी की दुकानों को हटवा दिया। इस कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल रहा और दुकानदारों तथा प्रशासन के बीच हल्की नोक-झोंक भी हुई, हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को अंजाम दिया गया। प्रशासन के अनुसार, लोहियानगर चौक पर लंबे समय से सड़क किनारे अस्थायी दुकानों के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। प्रतिदिन जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी, जिससे आम राहगीरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। अधिकारियों का कहना है कि एम्बुलेंस और स्कूली वाहनों को भी जाम के कारण निकलने में कठिनाई हो रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया। सुबह से ही नगर प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई थी। बुलडोजर और अन्य संसाधनों के साथ सड़क किनारे लगी दुकानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कई दुकानदारों ने विरोध जताया और प्रशासन से कुछ समय की मोहलत देने की मांग की, लेकिन अभियान जारी रहा। पुलिस और कुछ दुकानदारों के बीच बहस भी हुई, हालांकि किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। हटाए गए दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से इसी स्थान पर फल और सब्जी की दुकान लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। उनका आरोप है कि कार्रवाई से पहले उन्हें पर्याप्त पूर्व सूचना नहीं दी गई, जिससे उनका सामान भी क्षतिग्रस्त हुआ और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। कई दुकानदारों ने कहा कि उनकी रोजी-रोटी का एकमात्र साधन यही दुकानें थीं और अचानक हटाए जाने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। दुकानदारों ने प्रशासन से वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका तर्क है कि वे शहर की स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। यदि उन्हें व्यवस्थित ढंग से कोई स्थान आवंटित कर दिया जाए, तो वे नियमों का पालन करते हुए अपना व्यवसाय जारी रख सकते हैं। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का एक वर्ग प्रशासन की इस कार्रवाई का समर्थन करता नजर आया। उनका कहना है कि चौक पर रोज लगने वाले जाम से लोगों को भारी असुविधा होती थी। खासकर कार्यालय समय और विद्यालय समय में स्थिति बेहद खराब हो जाती थी। अब अतिक्रमण हटने के बाद लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है और यातायात व्यवस्था सुचारु होने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर को जाम मुक्त रखना और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अतिक्रमण हटाओ अभियान आगे भी जारी रहेगा और अन्य क्षेत्रों में भी ऐसी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक सड़कों और चौकों को अवैध कब्जे से मुक्त कराना आवश्यक है, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके। सुपौल में की गई यह कार्रवाई यह संकेत दे रही है कि प्रशासन अब अवैध अतिक्रमण के मामलों में सख्ती बरतने के मूड में है। हालांकि, इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि जाम से राहत और छोटे दुकानदारों के रोजगार के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाएगा। यदि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करता है, तो टकराव की स्थिति को टाला जा सकता है। फिलहाल, लोहियानगर चौक अतिक्रमण मुक्त हो गया है, लेकिन आगे की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


