मुंगेर गोलीकांड के ताप से बिगड़ेगी नीतीश सरकार की मिजाज,महंगी पड़ेगी चुप्पी
पटना।प्रदेश के मुंगेर जिले में मतदान के एक दिन पूर्व हुई पुलिस फायरिंग में एक निर्दोष के मारे जाने से तथा दर्जनों के जख्मी हो जाने के बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर वहां के डीएम तथा एसपी को हटा तो दिया गया।मगर इस पूरे प्रकरण में सीएम नीतीश कुमार की चुप्पी एनडीए को काफी महंगी पड़ सकती है।सनद रहे कि मुंगेर गोली कांड के बाद राजद की ओर से तेजस्वी यादव तथा लोजपा की ओर से चिराग पासवान ने त्वरित बयान जारी करते हुए मुंगेर के एसपी लिपि सिंह पर हत्या का मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग कर दी थी।चुनाव आयोग के निर्देश पर दो दिन के उपरांत डीएम तथा एसपी को हटा दिया गया।मगर इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप रहें।इतना ही मुंगेर के सांसद ललन सिंह भी मुंगेर गोलीकांड से जुड़े पत्रकारों के सवाल का बगैर कोई जवाब दिए चलते बने।मुंगेर गोलीकांड पर एनडीए का रुख भाजपा के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है।दरअसल देश भर में इस प्रकार की अन्य घटनाओं पर भाजपा जितना रौद्र रूप अख्तियार करती है।मुंगेर गोली कांड के बाद भाजपा के वैसी प्रतिक्रिया नहीं दिखी।उल्लेखनीय है कि मतदान के एक दिन पूर्व प्रतिमा विसर्जन के दौरान मुंगेर में पुलिस ने भीड़ पर गोली चलाई।जिससे एक युवक की मौत हो गई,कई घायल हैं।इतना ही नहीं पुलिस के द्वारा प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे लोगों पर जमकर बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज भी किया गया।राष्ट्रीय स्तर पर इस घटना की निंदा विभिन्न राजनीतिक दलों तथा सामाजिक विचारकों के द्वारा निंदा किया जा चुका है।मतदान के उपरांत चुनाव आयोग के निर्देश पर मुंगेर के डीएम राजेश मीणा तथा एसपी लिपि सिंह को हटा दिया गया।कल भी मुंगेर में आमजनों ने प्रशासन के खिलाफ हिंसक कार्रवाई की थी।मुंगेर में आक्रोशित लोगों ने दो थानों में आग लगा दिया।एसपी के कार्यालय पर पत्थरबाजी की गई।इस पूरे प्रकरण में एनडीए खासकर जदयू की चुप्पी प्रदेश के आम आवाम को खटक रही हैं। दरअसल बिहार के लोग इसे पुलिसिया अत्याचार के रूप में देख रहे हैं।जैसा कि मामला है,अभी ऐसे में आम जनता के ऊपर किए गए पुलिस के बर्बरता पूर्वक कार्रवाई के उपरांत सत्ताधारी दल चुप बैठे तो निश्चित तौर पर दूसरे तथा तीसरे चरण के मतदान में खामियाजा उठाने का संभावना बढ़ जाती है।


