बिहार में भाजपा-जदयू के बीच ‘सबकुछ ठीक’ होने पर फिर उठे सवाल, मंत्रिमंडल की बैठक ने बढ़ाई सियासी हलचल
- कैबिनेट बैठक के बाद भाजपा कोटे के मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अलग बैठक, राजद ने उठाए सवालतेजस्वी यादव के
- नेतृत्व में 19 अगस्त को राजभवन मार्च की तैयारी, श्रवण कुमार ने विपक्ष के आरोपों को बताया बेवजह
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर सबकुछ ठीक नहीं होने की चर्चा तेज हो गई है। इसकी वजह बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा कोटे के मंत्रियों के बीच हुई अलग बैठक को माना जा रहा है। मंत्रिमंडल की बैठक समाप्त होने के बाद जदयू कोटे के मंत्री अपने-अपने कार्यक्रमों के लिए निकल गए, जबकि भाजपा कोटे के मंत्रियों को मुख्यमंत्री आवास बुलाए जाने की बात सामने आई। मुख्यमंत्री के साथ हुई इस अलग बैठक के बाद कई मंत्रियों के मुख्यमंत्री आवास के पीछे के दरवाजे से निकलने की चर्चा ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।
भाजपा मंत्रियों की अलग बैठक पर राजद का हमला
मुख्यमंत्री और भाजपा कोटे के मंत्रियों की इस बैठक को राजद ने राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। राजद नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी आवश्यकता थी, जिसके कारण केवल भाजपा कोटे के मंत्रियों को बैठक के लिए बुलाया गया और गठबंधन के दूसरे घटक दल जदयू के मंत्रियों को इससे अलग रखा गया। राजद की ओर से कहा गया कि इस बैठक में क्या चर्चा हुई, इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पार्टी ने तंज कसते हुए सवाल किया कि भाजपा ने यह बैठक बिहार के विकास के लिए की या अपने विकास के लिए। राजद नेताओं का कहना है कि जब सरकार गठबंधन की है और मंत्रिमंडल में अलग-अलग दलों के मंत्री शामिल हैं, तो केवल एक दल के मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री की बैठक होने से स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होंगे। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने भी बैठक को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संभव है कि बैठक में किसी विशेष राजनीतिक या प्रशासनिक एजेंडे पर चर्चा हुई हो और इसी कारण सिर्फ भाजपा के मंत्रियों को बुलाया गया हो। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल के दूसरे मंत्री भी जानना चाहेंगे कि आखिर उस बैठक में क्या हुआ।
जदयू ने कहा- बैठक को लेकर अटकलों की जरूरत नहीं
वहीं, राजद के आरोपों के बीच जदयू ने पूरे मामले को सामान्य बताया है। जदयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा के मंत्रियों से बातचीत कर रहे थे तो इसमें किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बैठक को लेकर किसी तरह की अटकल लगाने की आवश्यकता नहीं है। श्रवण कुमार के मुताबिक, भाजपा के मंत्रियों ने उन्हें बताया है कि बैठक किस वजह से हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास भी अगले दिन कई मंत्री आए थे और अलग-अलग विषयों पर उनसे बातचीत हुई। उनके अनुसार, गठबंधन में किसी तरह की समस्या नहीं है और सबकुछ ठीक है। इस बयान के जरिए जदयू ने यह संदेश देने की कोशिश की कि भाजपा और जदयू के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है। हालांकि विपक्ष को इस सफाई से राजनीतिक मुद्दा खत्म होता दिखाई नहीं दे रहा है।
राजभवन मार्च को लेकर भी सियासत तेज
इसी बीच पटना में 19 अगस्त को राजद की ओर से राजभवन मार्च की तैयारी ने बिहार की राजनीति को और गरमा दिया है। यह मार्च राजद नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व में निकाला जाएगा। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक और सांसद इसमें शामिल होंगे। मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा। राजद का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर यह मार्च किया जा रहा है, उनमें जिम्मेदारी तय करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग प्रमुख होगी। पार्टी ने सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरा
भाई वीरेंद्र ने हाजीपुर में ठेकेदार रामनरेश राय की हत्या, पटना में एक युवक को गोली मारे जाने और बेगूसराय में युवक को गोली लगने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और अपराधियों के मन में पुलिस का भय नहीं रह गया है। उन्होंने पुलिसकर्मियों पर जमीन खरीदने में व्यस्त रहने जैसे आरोपों की भी जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि पुलिसकर्मी अपने मूल दायित्व से हटकर दूसरे कामों में लगे हैं तो इसका असर कानून-व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन में हथियार ले जाने पर रोक का स्वागत
राजद विधायक ने धरना-प्रदर्शन और जुलूस के दौरान पुलिसकर्मियों के एके-47 और अन्य आक्रमणकारी हथियार लेकर जाने पर रोक लगाने के पुलिस मुख्यालय के फैसले का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला देर से लिया गया, लेकिन सही कदम है। वहीं, तेजस्वी यादव के राजभवन मार्च को लेकर मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को बिहार की जनता ने एक सीट कम दी होती तो तेजस्वी यादव नेता प्रतिपक्ष भी नहीं होते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो व्यक्ति पहले ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तारीख तक घोषित कर चुका हो, वह कहीं भी जा सकता है। श्रवण कुमार ने कहा कि राजद जिन मुद्दों को लेकर राजभवन जा रहा है, उन पर सरकार पहले से कार्रवाई कर रही है। ऐसे में विपक्ष का मार्च राजनीतिक प्रदर्शन से अधिक कुछ नहीं है। इस तरह एक तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन अपने भीतर किसी मतभेद से इनकार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राजद लगातार सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में जुटा है। भाजपा के मंत्रियों की अलग बैठक और आगामी राजभवन मार्च ने बिहार की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह महज राजनीतिक अटकल है या गठबंधन के भीतर वास्तव में कोई नई खींचतान आकार ले रही है।


