August 13, 2026

बिहार में बढ़ेगा बालू खनन का दायरा, नए घाटों की तलाश शुरू; 10 फीसदी तक बढ़ सकती है संख्या

  • खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलों को संभावित स्थलों की पहचान का निर्देश दिया, मौके पर जाकर होगा भौतिक सर्वे
  • पर्याप्त बालू मिलने पर जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में शामिल होंगे नए घाट, फिर नीलामी के दायरे में लाने की तैयारी

पटना। बिहार में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ाने और खनन गतिविधियों का दायरा विस्तार करने की तैयारी शुरू हो गई है। खान एवं भूतत्व विभाग अब राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नए संभावित बालू घाटों की तलाश कराएगा। विभाग की योजना के तहत पहले ऐसे स्थानों की पहचान की जाएगी, जहां पर्याप्त मात्रा में बालू उपलब्ध होने की संभावना है। इसके बाद अधिकारियों की टीम मौके पर जाकर भौतिक सर्वे करेगी। विभागीय आकलन के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद राज्य में बालू घाटों की संख्या मौजूदा संख्या की तुलना में करीब 8 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। हालांकि नए घाटों को अंतिम रूप देने से पहले उनकी वास्तविक स्थिति, उपलब्ध बालू की मात्रा और खनन की व्यवहारिक संभावना की जांच की जाएगी। यानी केवल सरकारी कागजात या पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किसी स्थान को नया बालू घाट घोषित नहीं किया जाएगा।
जिलों को संभावित स्थलों की पहचान का निर्देश
खान एवं भूतत्व विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित नए बालू घाटों की पहचान करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से ऐसे स्थानों की सूची तैयार करने को कहा गया है, जहां बालू की पर्याप्त उपलब्धता होने की संभावना है। विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह के अनुसार, शुरुआती स्तर पर संभावित स्थलों की पहचान की जाएगी। इसके बाद अधिकारियों की टीम संबंधित स्थानों पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। इस दौरान यह देखा जाएगा कि वहां कितनी मात्रा में बालू मौजूद है और क्या नियमानुसार खनन किया जा सकता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए घाटों का निर्धारण केवल कागजी दावों के आधार पर नहीं हो। जमीन पर मौजूद परिस्थितियों और पर्यावरणीय तथा खनन संबंधी संभावनाओं को देखने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
भौतिक सर्वे के बाद बदलेगी जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट
नए बालू घाटों की पहचान और भौतिक जांच पूरी होने के बाद संबंधित जिलों की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में उन स्थानों को शामिल किया जाएगा, जहां सर्वे के दौरान पर्याप्त बालू और नियमानुसार खनन की संभावना पाई जाएगी। जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट यानी डीएसआर में किसी स्थान को शामिल करना नए घाट के रूप में उसकी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण होगा। विभागीय जांच में यदि किसी स्थल पर बालू की पर्याप्त मात्रा नहीं मिलती या वहां खनन व्यवहारिक नहीं पाया जाता है, तो उसे नए घाट के रूप में आगे बढ़ाने की संभावना नहीं होगी। इस तरह सर्वेक्षण के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शुरुआती स्तर पर चिन्हित किए गए संभावित स्थलों में से कितने वास्तव में नए बालू घाट बनने की पात्रता रखते हैं।
नीलामी के दायरे में आएंगे नए घाट
जिन स्थानों को सर्वेक्षण के बाद जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा, उन्हें आगे नीलामी की प्रक्रिया में लाया जा सकता है। नीलामी के माध्यम से इन नए बालू घाटों के संचालन और खनन की व्यवस्था की जाएगी। नए घाटों को नीलामी में शामिल करने से राज्य में वैध बालू खनन का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। इससे एक तरफ निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ सकती है, वहीं दूसरी ओर सरकार को खनन से प्राप्त होने वाले राजस्व में भी वृद्धि होने की संभावना है। विभाग का मानना है कि व्यवस्थित तरीके से नए घाटों को विकसित करने से बालू की मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। निर्माण क्षेत्र में सड़क, भवन, पुल और अन्य परियोजनाओं के लिए बालू की लगातार आवश्यकता रहती है।
कागजी रिकॉर्ड के बजाय जमीन पर होगी जांच
नई व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण पहलू भौतिक सर्वेक्षण को माना जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल पुराने कागजी रिकॉर्ड के आधार पर किसी स्थान को नया घाट घोषित नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को मौके पर जाकर उपलब्ध बालू, घाट की स्थिति और खनन की संभावनाओं का मूल्यांकन करना होगा। इससे संभावित घाटों की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। साथ ही यह भी पता चलेगा कि किन क्षेत्रों में नियमों के तहत खनन संभव है और किन क्षेत्रों में किसी कारण से इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
अब सर्वे के नतीजों पर टिकी नजर
फिलहाल विभाग ने संभावित स्थलों की पहचान और उनके भौतिक सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है। आने वाले चरण में जिलों से संभावित घाटों की सूची प्राप्त होने के बाद संबंधित स्थानों पर जांच कराई जाएगी। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राज्य के अलग-अलग जिलों में कितने नए संभावित घाट सामने आते हैं और भौतिक सर्वेक्षण के बाद उनमें से कितने वास्तव में नए बालू घाट के रूप में योग्य पाए जाते हैं। विभागीय आकलन के मुताबिक घाटों की संख्या में 8 से 10 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, लेकिन अंतिम तस्वीर सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि पर्याप्त संख्या में नए घाट चिन्हित होकर नीलामी प्रक्रिया तक पहुंचते हैं, तो इससे राज्य में बालू खनन का वैध दायरा बढ़ सकता है। साथ ही निर्माण गतिविधियों के लिए उपलब्धता और सरकारी राजस्व, दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

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