बांकीपुर में जन सुराज का बड़ा उलटफेर, भाजपा का अभेद्य गढ़ टूटा; प्रशांत किशोर ने 18953 मतों से दर्ज की ऐतिहासिक जीत
- पांच बार के भाजपा गढ़ में पहली बार जन सुराज का परचम, पहले चरण से मिली बढ़त अंत तक रही कायम
- जीत के बाद प्रशांत किशोर बोले– यह बांकीपुर की जनता का जनादेश है, भाजपा नेतृत्व को बिहार के लिए सही चेहरा चुनने का संदेश
पटना। बिहार की राजनीति की सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट पर इस बार इतिहास रचते हुए जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज की है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राजनीतिक गढ़ माने जाने वाले इस विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज ने बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा के प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 18953 मतों के बड़े अंतर से पराजित कर दिया। मतगणना के पहले चरण से ही प्रशांत किशोर ने जो बढ़त बनाई, वह अंतिम परिणाम तक बरकरार रही। भाजपा के प्रत्याशी पूरे चुनाव के दौरान यह बढ़त कम नहीं कर सके। इस परिणाम के साथ ही बांकीपुर में वर्षों से कायम भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक वर्चस्व टूट गया और बिहार की राजनीति को नया संदेश मिला। बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी की सबसे मजबूत सीटों में गिनी जाती रही है। इसी सीट से नितिन नवीन लगातार पांच बार विधायक चुने गए और हर चुनाव में प्रभावशाली जीत दर्ज करते रहे। वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव में भी नितिन नवीन ने 98299 मत प्राप्त कर 51000 से अधिक मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। लेकिन इस उपचुनाव में राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के दौरान लगातार जनसंपर्क अभियान चलाया और मतदाताओं का भरोसा जीतने में सफल रहे। मतगणना शुरू होने के साथ ही पहले चरण से उन्हें बढ़त मिली, जो प्रत्येक चरण के साथ और मजबूत होती चली गई। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित अंतिम परिणाम के अनुसार प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी नीरज सिन्हा को 18953 मतों के अंतर से पराजित कर बांकीपुर विधानसभा सीट पर कब्जा कर लिया। यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक सीट पर जन सुराज की यह सफलता आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संदेश लेकर आई है। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं। उन्हें कुल 1485 मत प्राप्त हुए, जो विजयी प्रत्याशी के जीत के अंतर से भी कम रहे। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि इस उपचुनाव का मुख्य मुकाबला जन सुराज और भारतीय जनता पार्टी के बीच ही केंद्रित रहा। राजद इस चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सका। जीत के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने इस परिणाम को बांकीपुर की जनता का जनादेश बताया। उन्होंने कहा, “यह बांकीपुर की जनता की जीत है। यह केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं था, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को संदेश देने का चुनाव था कि बिहार के लिए एक अच्छा और स्वच्छ छवि वाला नेतृत्व चुना जाए। बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य का नेतृत्व ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपा जाना चाहिए, जिसकी छवि को लेकर जनता के मन में सवाल हों।” प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता ने विकास, सुशासन और नई राजनीति के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करेंगे और बांकीपुर के समग्र विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाएंगे। जन सुराज के कार्यकर्ताओं ने परिणाम घोषित होने के बाद पूरे उत्साह के साथ जीत का जश्न मनाया। पार्टी कार्यालय और मतगणना केंद्र के बाहर समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, एक-दूसरे को बधाई दी और ढोल-नगाड़ों की धुन पर नृत्य किया। समर्थकों का कहना था कि यह केवल एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में परिवर्तन की शुरुआत है। उन्होंने इसे जनता के विश्वास और नई राजनीतिक सोच की जीत बताया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का परिणाम आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा। जिस सीट को वर्षों से भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य किला माना जाता था, वहां जन सुराज की जीत ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। विशेष रूप से इसलिए भी क्योंकि भाजपा इस सीट पर अपनी बढ़त पहले चरण से ही वापस नहीं ला सकी।बांकीपुर उपचुनाव का अंतिम परिणाम अब बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा। प्रशांत किशोर की यह जीत जन सुराज पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का अवसर लेकर आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस उपचुनाव का प्रभाव आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति और राजनीतिक विमर्श पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।


