नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल से पटना बेहाल, सफाई व्यवस्था चरमराई; निगम ने एजेंसियों पर लगाया 21.95 करोड़ का जुर्माना

  • छठे दिन भी जारी रही अनिश्चितकालीन हड़ताल, बारिश से सड़कों और मोहल्लों में कचरे का अंबार, संक्रमण का खतरा बढ़ा
  • सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए नगर निगम ने उतारे लगभग 100 वाहन, अनुबंध उल्लंघन पर आउटसोर्सिंग एजेंसियों को कारण बताओ सूचना जारी

पटना। पटना नगर निगम समेत बिहार के सभी नगर निकायों के कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को छठे दिन में प्रवेश कर गई। हड़ताल का सबसे अधिक असर राजधानी पटना की सफाई व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। शहर की प्रमुख सड़कों, गलियों, बाजारों और आवासीय इलाकों में कचरे के बड़े-बड़े ढेर जमा हो गए हैं। सोमवार को हुई बारिश ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया। जलभराव के बीच सड़ता हुआ कचरा दुर्गंध फैला रहा है, जिससे लोगों का घरों से निकलना कठिन हो गया है। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने सफाई व्यवस्था बाधित होने के लिए जिम्मेदार मानी जा रही बाह्य सेवा एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 21 करोड़ 95 लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। नगर निगम का कहना है कि हड़ताल के दौरान बाह्य सेवा एजेंसियों ने पर्याप्त संख्या में सफाईकर्मी और वाहन चालक उपलब्ध नहीं कराए। इसके कारण घर-घर कचरा संग्रहण और नियमित सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। निगम प्रशासन ने इसे अनुबंध की शर्तों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए संबंधित एजेंसियों को लगातार दूसरे दिन कारण बताओ सूचना जारी की है। साथ ही आर्थिक दंड लगाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि आवश्यक जनसेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। हड़ताल और बारिश की दोहरी चुनौती के बीच नगर निगम ने वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से सफाई अभियान तेज करने का दावा किया है। प्रशासन के अनुसार सोमवार को लगभग 100 वाहनों को विभिन्न इलाकों में लगाया गया। इन वाहनों की सहायता से घर-घर अभियान चलाकर प्रतिदिन औसतन 300 टन कचरे का उठाव किया जा रहा है। इसके बावजूद शहर के अनेक क्षेत्रों में कचरे का जमाव बना हुआ है और स्थानीय लोगों को दुर्गंध, गंदगी तथा संभावित संक्रामक बीमारियों के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार राजधानी के नूतन राजधानी अंचल में विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान 23 घर-घर कचरा संग्रहण वाहनों की सहायता से जगदेव पथ, जयप्रकाश नगर, एसके पुरी, सचिवालय क्षेत्र, स्टेशन रोड, गर्दनीबाग तथा आसपास के इलाकों से कचरे का उठाव कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अधिक से अधिक क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके। इधर, बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना को देखते हुए प्रशासन ने एएन कॉलेज परिसर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया। मतगणना केंद्र के आसपास सफाई बनाए रखने के लिए दो विशेष खुले मालवाहक वाहनों की तैनाती की गई, ताकि चुनाव संबंधी गतिविधियों के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो और परिसर पूरी तरह स्वच्छ बना रहे। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि हड़ताल के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन आवश्यक सेवाओं को पूरी तरह ठप नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए जा रहे हैं और वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से नियमित कचरा उठाव जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरी ओर, हड़ताली कर्मी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं। अब तक दोनों पक्षों के बीच किसी ठोस समाधान की घोषणा नहीं हुई है, जिससे गतिरोध बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बरसात के मौसम में लंबे समय तक कचरा खुले में पड़ा रहने से मच्छरों और अन्य रोग फैलाने वाले जीवों की संख्या बढ़ सकती है। इससे डेंगू, मलेरिया, दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में नियमित सफाई और कचरा निष्पादन अत्यंत आवश्यक है। राजधानी के नागरिकों का कहना है कि लगातार कई दिनों से कचरा नहीं उठने के कारण सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। बाजारों, आवासीय कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी बढ़ने से लोगों में नाराजगी भी देखी जा रही है। नागरिकों ने प्रशासन और हड़ताली कर्मियों से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है। फिलहाल नगर निगम प्रशासन वैकल्पिक संसाधनों के सहारे सफाई व्यवस्था को सामान्य बनाने में जुटा है, जबकि हड़ताल जारी रहने से स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो राजधानी में कचरे का संकट और अधिक गहरा सकता है तथा इसका सीधा प्रभाव जनस्वास्थ्य और शहरी जीवन पर पड़ने की आशंका बनी रहेगी।

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