पटना परेशान, बिहार सरकार करे समाधान!मिक्स्ड लैंड यूज को लेकर बढ़ी अनिश्चितता,वर्षों से चल रहे कारोबार को लेकर उठे सवाल
पटना। राजधानी पटना में आवासीय इलाकों में वर्षों से चल रहे छोटे-बड़े कारोबार और मिक्स्ड लैंड यूज (मिश्रित भूमि उपयोग) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर निगम की कार्रवाई और नोटिस के बाद व्यापारियों तथा स्थानीय लोगों के बीच अपने कारोबार और रोजी-रोटी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

व्यापारियों का कहना है कि पटना में कई ऐसे बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं, जो वर्षों से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों के मिश्रित उपयोग वाले इलाकों में संचालित हो रहे हैं। इनमें किराना दुकान, मेडिकल स्टोर, कपड़े की दुकान, स्टेशनरी, छोटे कार्यालय और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े कारोबार शामिल हैं।
व्यापारियों का सवाल है कि यदि दशकों से चल रहे इन कारोबारों को अचानक अनधिकृत मानकर नोटिस या जुर्माने की कार्रवाई की जाती है, तो इसका सीधा असर छोटे दुकानदारों और उनसे जुड़े परिवारों की आय पर पड़ेगा।
सरकार से क्या हैं मांगें?
व्यापारियों और प्रभावित लोगों की ओर से सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी जा रही हैं।
पहली मांग— रेगुलराइजेशन: वर्षों पुराने निर्माण और लंबे समय से चल रहे मिश्रित उपयोग वाले कारोबारों को नियमों के तहत नियमित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
दूसरी मांग—नया मास्टर प्लान: पटना के वर्तमान स्वरूप और बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं व्यावहारिक न्यू मास्टर प्लान लागू किया जाए, ताकि शहर की जमीनी हकीकत और पुराने बसे इलाकों को भी ध्यान में रखा जा सके।
तीसरी मांग—मिक्स्ड लैंड यूज की स्पष्ट अनुमति: जहां आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से साथ-साथ चल रही हैं, वहां रेसिडेंशियल + कमर्शियल यूज को लेकर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाए।
चौथी मांग—उत्पीड़न पर रोक: व्यापारियों का कहना है कि नोटिस और जुर्माने की कार्रवाई करने से पहले नियमों को सरल और स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि छोटे कारोबारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
पांचवीं मांग—संवाद से समाधान: व्यापारियों का आग्रह है कि सरकार और नगर निगम प्रभावित लोगों के साथ बैठकर समस्या का स्थायी समाधान निकालें। उनका कहना है कि केवल नोटिस और कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी।
सवाल सिर्फ दुकानों का नहीं, रोजगार का भी
पटना में हजारों छोटे-बड़े कारोबार सीधे तौर पर लोगों की आजीविका से जुड़े हैं। मोहल्लों में मौजूद छोटी दुकानें स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी करती हैं। ऐसे में कारोबार बंद होने की स्थिति में दुकानदारों के साथ-साथ आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि शहर का विकास जरूरी है, लेकिन विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें पुराने कारोबार, छोटे दुकानदार और आम जनता भी सुरक्षित रहें।
अब नजर बिहार सरकार के अगले कदम पर है। क्या सरकार व्यापारियों की मांगों पर विचार करते हुए रेगुलराइजेशन, न्यू मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज को लेकर कोई स्पष्ट नीति बनाएगी या नगर निगम की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी?
व्यापारियों की अपील है—नियम जरूर हों, लेकिन समाधान व्यावहारिक हो। क्योंकि व्यापार बचेगा, तभी पटना बढ़ेगा।

