पटना में बनेगा देश का पहला आच्छादित वनस्पति उद्यान, राजधानी को मिलेगी पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण की नई पहचान

  • जेपी गंगा पथ के किनारे पाँच एकड़ में विकसित होगा आधुनिक उद्यान, दुर्लभ पौधों और हरित गृह की भी होगी व्यवस्था
  • विद्यार्थियों के अध्ययन, पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा, तितली उद्यान भी होगा विकसित

पटना। बिहार की राजधानी पटना जल्द ही देश के पहले आच्छादित वनस्पति उद्यान की सौगात पाने जा रही है। यह अत्याधुनिक उद्यान जेपी गंगा पथ के किनारे लगभग पाँच एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। राज्य पथ विकास निगम ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कार्ययोजना तैयार कर ली है तथा इसे प्रशासनिक स्वीकृति भी मिल चुकी है। इस उद्यान का निर्माण सिंगापुर में विकसित विश्वस्तरीय आच्छादित वनस्पति उद्यान की तर्ज पर किया जाएगा। इसके निर्माण से न केवल राजधानी की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और वनस्पति शिक्षा के क्षेत्र में भी नई संभावनाओं का विस्तार होगा।
सिंगापुर की तर्ज पर आधुनिक उद्यान
प्रस्तावित आच्छादित वनस्पति उद्यान पूरी तरह से चारों ओर तथा ऊपर से बंद रहेगा। इसकी छत विशेष प्रकार के तापरोधी कांच अथवा पारदर्शी प्लास्टिक से तैयार की जाएगी, जिससे प्राकृतिक प्रकाश का संतुलित प्रवेश बना रहेगा और भीतर का वातावरण नियंत्रित रखा जा सकेगा। इस तकनीक के माध्यम से पौधों के लिए आवश्यक तापमान, आर्द्रता और अनुकूल जलवायु बनाए रखने में सहायता मिलेगी। यही विशेषता इस उद्यान को देश के अन्य वनस्पति उद्यानों से अलग पहचान प्रदान करेगी।
उद्यान में लोगों के लिए आकर्षक सुविधाएं
इस उद्यान को केवल पौधों के संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे एक आधुनिक पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया जाएगा। यहां आने वाले लोगों के लिए बैठने, टहलने और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने की विशेष व्यवस्था होगी। हरियाली और रंग-बिरंगे पौधों के बीच सैर करने का अनुभव लोगों को प्रकृति के और निकट ले जाएगा। उद्यान में प्रवेश के लिए टिकट की व्यवस्था भी होगी, जिससे इसके रखरखाव और संचालन में सहायता मिलेगी।
हरित गृह में होंगे दुर्लभ पौधे
आच्छादित वनस्पति उद्यान के समीप एक हरित गृह का भी निर्माण किया जाएगा। यह ऐसा नियंत्रित परिसर होगा, जहां पौधों को प्रतिकूल मौसम, तेज धूप, अत्यधिक वर्षा तथा कीटों से सुरक्षित रखते हुए अनुकूल वातावरण में विकसित किया जाएगा। यहां देश और विदेश से लाए गए दुर्लभ तथा विशेष प्रजातियों के पौधों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा। जब ये पौधे स्थानीय जलवायु के अनुरूप विकसित हो जाएंगे, तब उन्हें उद्यान अथवा अन्य सार्वजनिक हरित क्षेत्रों में लगाया जाएगा। इससे जैव विविधता के संरक्षण को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
विद्यार्थियों के लिए बनेगा अध्ययन केंद्र
यह परियोजना विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। यहां विभिन्न प्रकार के पौधों, उनके विकास, संरक्षण और पर्यावरणीय महत्व को निकट से समझने का अवसर मिलेगा। विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए यह एक जीवंत अध्ययन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां वे पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त कर सकेंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई पीढ़ी में जागरूकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
तितलियों का विशेष उद्यान भी बनेगा
इस परियोजना के अंतर्गत सभ्यता द्वार के सामने लगभग दो एकड़ क्षेत्र में तितली उद्यान का भी निर्माण किया जाएगा। इस उद्यान में ऐसे पौधे लगाए जाएंगे, जिनकी ओर तितलियां स्वाभाविक रूप से आकर्षित होती हैं। रंग-बिरंगी तितलियों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के विकास की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल होगी। यह स्थल बच्चों, पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
विविध पौधों से सजेगा उद्यान
आच्छादित वनस्पति उद्यान में ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी, जो कम प्रकाश, नियंत्रित तापमान और संतुलित आर्द्रता वाले वातावरण में बेहतर ढंग से विकसित होते हैं। यहां वायु को शुद्ध करने वाले पौधों के साथ-साथ सजावटी पौधों की अनेक प्रजातियां लगाई जाएंगी। एलोवेरा, जेड पौधा, विभिन्न प्रकार के कैक्टस, डहेलिया, गुलदाउदी तथा अन्य मौसमी पुष्प भी इस उद्यान की शोभा बढ़ाएंगे। इसके अतिरिक्त औषधीय, सजावटी और दुर्लभ प्रजातियों के पौधों का भी संरक्षण किया जाएगा।
पर्यटन और पर्यावरण को मिलेगा नया आयाम
राज्य पथ विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार जेपी गंगा पथ के आसपास के पूरे क्षेत्र को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में आच्छादित वनस्पति उद्यान, हरित गृह तथा तितली उद्यान जैसी परियोजनाओं को शामिल किया गया है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राजधानी पटना को एक नया पर्यटन आकर्षण मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। साथ ही हरित क्षेत्र का विस्तार होने से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा नागरिकों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। देश का पहला आच्छादित वनस्पति उद्यान बनने जा रहा यह महत्वाकांक्षी प्रकल्प बिहार के लिए गौरव का विषय है। यह परियोजना आधुनिक तकनीक, पर्यावरण संरक्षण, वनस्पति अनुसंधान, पर्यटन और जनसुविधाओं का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगी। इसके साकार होने के बाद पटना न केवल अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए, बल्कि आधुनिक हरित अवसंरचना और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी देशभर में एक नई मिसाल कायम करेगा।

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