September 16, 2026

मेट्रो निर्माण के लिए बेली रोड की एक लेन होगी बंद, 22 जून से बदलेगी राजधानी की यातायात व्यवस्था

  • आयकर गोलंबर से गोल्फ क्लब तक नेहरू पथ पर लागू होगी नई व्यवस्था, 20 और 21 जून को होगा परीक्षण
  • व्यावसायिक वाहनों के लिए बदले जाएंगे मार्ग, राजधानीवासियों को जाम और डायवर्जन के लिए रहना होगा तैयार

पटना।  राजधानी पटना की जीवनरेखा मानी जाने वाली बेली रोड पर जल्द ही यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। शहर में मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण कार्य को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन ने आयकर गोलंबर से गोल्फ क्लब (पटेल भवन) तक नेहरू पथ की एक लेन को 22 जून से पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य मेट्रो स्टेशन और ट्रैक निर्माण कार्य को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना है, लेकिन इसके साथ ही राजधानी की यातायात व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना भी जताई जा रही है। प्रशासन ने नई व्यवस्था को लागू करने से पहले दो चरणों में परीक्षण करने की योजना बनाई है। पहला परीक्षण 20 जून को दिन में 11 बजे किया जाएगा, जबकि दूसरा परीक्षण 21 जून को व्यस्त यातायात अवधि के दौरान होगा। इन परीक्षणों के माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद किन मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ सकता है और उससे निपटने के लिए अतिरिक्त प्रबंधों की आवश्यकता कितनी होगी। नई यातायात योजना के अनुसार आयकर गोलंबर से चिड़ियाघर और दानापुर की दिशा में जाने वाली एक लेन को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद इस मार्ग पर केवल एक लेन के माध्यम से यातायात संचालित होगा। प्रशासन ने इस सीमित लेन पर निजी वाहनों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इससे राजधानी के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल बेली रोड पर वाहनों की गति और यातायात प्रवाह प्रभावित होने की संभावना है। यातायात विभाग के अधिकारियों का मानना है कि मेट्रो निर्माण कार्य शहर के भविष्य के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान कुछ अस्थायी असुविधाएं नागरिकों को झेलनी पड़ सकती हैं। इसी कारण लोगों से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की अपील भी की गई है। नई व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव व्यावसायिक और मालवाहक वाहनों पर पड़ने वाला है। आयकर गोलंबर से विकास भवन और गोल्फ क्लब की ओर जाने वाले सभी व्यवसायिक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। ऐसे वाहनों को अब वैकल्पिक मार्ग से होकर गुजरना होगा। निर्धारित योजना के अनुसार इन वाहनों को वीरचंद पटेल पथ की ओर मोड़ा जाएगा। वहां से वे आर ब्लॉक, हार्डिंग रोड, पटेल गोलंबर, हवाई अड्डा मार्ग और डुमरा चौकी होते हुए पुनः बेली रोड में प्रवेश कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मार्ग परिवर्तन के कारण राजधानी के कई अन्य प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त यातायात दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से वीरचंद पटेल पथ, हार्डिंग रोड और हवाई अड्डा मार्ग पर वाहनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके लिए यातायात पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। दूसरी ओर, पटेल भवन से आयकर गोलंबर की ओर आने वाली लेन में केवल निजी वाहनों को आवागमन की अनुमति दी जाएगी। मालवाहक और भारी वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे निजी वाहन चालकों को कुछ हद तक सुविधा मिलेगी और यातायात का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी। यातायात पुलिस अधीक्षक (प्रभार) सतीश कुमार ने बताया कि परीक्षण का मुख्य उद्देश्य संभावित समस्याओं को पहले से पहचानना और उनका समाधान तैयार करना है। उन्होंने कहा कि परीक्षण के दौरान प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर अंतिम यातायात योजना को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। प्रशासन चाहता है कि 22 जून से लागू होने वाली व्यवस्था न्यूनतम अव्यवस्था के साथ सुचारु रूप से संचालित हो सके। मेट्रो परियोजना को राजधानी के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में से एक माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। हालांकि निर्माण कार्य के दौरान यातायात बाधाओं और जाम की समस्या से इनकार नहीं किया जा सकता। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानीवासियों को आने वाले दिनों में यात्रा की योजना पहले से बनानी होगी। लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने, अतिरिक्त समय लेकर निकलने और यातायात नियमों का पालन करने की सलाह दी गई है। प्रशासन भी नागरिकों को समय-समय पर यातायात संबंधी सूचनाएं उपलब्ध कराएगा। फिलहाल राजधानी के लोगों के सामने विकास और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। एक ओर मेट्रो परियोजना पटना को आधुनिक परिवहन व्यवस्था देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य के दौरान यातायात प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नई व्यवस्था शहर के यातायात दबाव को किस हद तक नियंत्रित कर पाती है और नागरिकों को कितनी राहत मिलती है।

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