बिहार में 26 हजार पदों पर होगी बहाली, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों-कर्मचारियों की कमी होगी दूर

  • राज्य के 13 विश्वविद्यालयों और संबद्ध महाविद्यालयों में 6,600 व्याख्याताओं की नियुक्ति की तैयारी
  • 211 नए डिग्री महाविद्यालयों में भी बड़े पैमाने पर बहाली, युवाओं को मिलेगा रोजगार और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए राहत और उम्मीद भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए व्यापक नियुक्ति अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। इस अभियान के तहत लगभग 26 हजार शिक्षकों और गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के 13 विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में वर्षों से बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं। इन रिक्तियों के कारण न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक सत्र भी लगातार बाधित हो रहे हैं। इसी स्थिति को सुधारने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। सबसे पहले विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में लगभग 6,600 व्याख्याताओं की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा 11 हजार से अधिक गैर शैक्षणिक कर्मियों के रिक्त पदों को भी भरा जाएगा। इनमें कार्यालय सहायक, लिपिकीय कर्मचारी, प्रयोगशाला कर्मी तथा अन्य प्रशासनिक पद शामिल होंगे। विभाग का लक्ष्य इस वर्ष के अंत तक नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा करने का है।
नए डिग्री महाविद्यालयों में भी होगी बड़ी बहाली
राज्य सरकार द्वारा 211 प्रखंडों में नए डिग्री महाविद्यालय स्थापित किए जा रहे हैं। इन संस्थानों को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए भी बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुल 9,284 नए पदों के सृजन को मंजूरी प्रदान की है। इन पदों में 6,752 शिक्षकों तथा 2,532 गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। नए महाविद्यालयों के खुलने से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ा है कमी का असर
वर्तमान समय में राज्य के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों तथा कर्मचारियों की भारी कमी बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शिक्षकों के कुल 12,411 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 5,800 पदों पर ही नियुक्तियां हैं। लगभग 6,611 पद अब भी रिक्त हैं। इसी प्रकार गैर शैक्षणिक कर्मचारियों के 16,557 स्वीकृत पदों में से केवल 5,583 पदों पर ही कर्मी कार्यरत हैं, जबकि 10,974 पद खाली पड़े हुए हैं। लंबे समय से नियुक्तियां नहीं होने के कारण प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों की कमी के कारण कई महाविद्यालयों में नियमित कक्षाएं नहीं चल पा रही हैं। समय पर पाठ्यक्रम पूरा नहीं हो रहा है और शैक्षणिक सत्र भी पीछे चल रहे हैं। इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है।
छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
नई नियुक्तियों के बाद महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य नियमित रूप से संचालित हो सकेगा। विद्यार्थियों को समय पर पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे की पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा है कि राज्य सरकार की प्राथमिकता शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और जल्द ही बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। राज्य सरकार का मानना है कि यह नियुक्ति अभियान केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा राज्य में शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों को नई गति मिलेगी।

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