जुलाई से बढ़ सकता है महंगाई भत्ता, केंद्रीय कर्मचारियों को 63 प्रतिशत डीए मिलने की उम्मीद

  • महंगाई सूचकांक के ताजा आंकड़ों से बढ़ी उम्मीद, सितंबर या अक्टूबर में हो सकता है आधिकारिक ऐलान
  • एरियर के रूप में मिल सकती है अतिरिक्त राशि, आठवें वेतन आयोग की चर्चाओं के बीच कर्मचारियों की निगाहें सरकार पर

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए आने वाले महीनों में राहत भरी खबर सामने आ सकती है। जुलाई 2026 से लागू होने वाले महंगाई भत्ता और महंगाई राहत में बढ़ोतरी को लेकर उम्मीदें तेज हो गई हैं। श्रम ब्यूरो द्वारा जारी महंगाई सूचकांक के ताजा आंकड़ों के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि केंद्र सरकार इस बार महंगाई भत्ते में तीन प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती है। यदि ऐसा होता है तो वर्तमान 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़कर 63 प्रतिशत हो जाएगा। गौरतलब है कि पिछली छमाही में केंद्र सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि की थी। इसके बाद महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत पर पहुंच गया था। अब लगातार बढ़ती महंगाई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों को देखते हुए एक बार फिर वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। महंगाई भत्ते की गणना औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर की जाती है। अप्रैल 2026 के लिए जारी आंकड़ों के अनुसार यह सूचकांक बढ़कर 149.9 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मई और जून के आंकड़े भी इसी प्रवृत्ति को बनाए रखते हैं तो जुलाई 2026 से महंगाई भत्ता 63 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। चूंकि सरकार आमतौर पर महंगाई भत्ते को पूर्णांक में लागू करती है, इसलिए तीन प्रतिशत वृद्धि की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि यह बढ़ोतरी जुलाई से प्रभावी होगी, लेकिन इसका औपचारिक ऐलान सितंबर या अक्टूबर में किए जाने की संभावना है। यदि सरकार सितंबर में इसकी घोषणा करती है तो कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त और सितंबर तीन महीनों का बकाया भुगतान मिलेगा। वहीं यदि घोषणा अक्टूबर में होती है तो जुलाई से अक्टूबर तक चार महीनों का बकाया एक साथ दिया जा सकता है। महंगाई भत्ते में प्रस्तावित वृद्धि का सीधा लाभ लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार रुपये है तो तीन प्रतिशत अतिरिक्त महंगाई भत्ते के रूप में उसे प्रतिमाह 540 रुपये अधिक प्राप्त होंगे। इस हिसाब से सितंबर में घोषणा होने पर तीन महीनों का बकाया 1,620 रुपये के आसपास बन सकता है, जबकि अक्टूबर में घोषणा होने की स्थिति में यह राशि दो हजार रुपये से अधिक पहुंच सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में महंगाई भत्ते में नियमित वृद्धि कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा के लिए आवश्यक है। उनका तर्क है कि बाजार में खाद्य पदार्थों, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी सेवाओं की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में महंगाई भत्ता कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है। इस बीच आठवें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कर्मचारी संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि नए वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से पहले महंगाई भत्ते के एक बड़े हिस्से को मूल वेतन में समाहित किया जाए। उनका मानना है कि इससे वेतन संरचना अधिक संतुलित और लाभकारी बनेगी। केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष आठवें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया शुरू की थी। उम्मीद की जा रही है कि आयोग अगले वर्ष की पहली छमाही तक अपनी सिफारिशें सरकार को सौंप सकता है। सूत्रों के अनुसार नई सिफारिशों को एक जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को कई महीनों का बकाया भुगतान भी प्राप्त हो सकता है, जिसकी राशि काफी बड़ी हो सकती है। फिलहाल देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी जुलाई 2026 की छमाही के महंगाई भत्ते को लेकर सरकार के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। महंगाई सूचकांक के मौजूदा रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि इस बार कर्मचारियों को आर्थिक राहत का एक और महत्वपूर्ण तोहफा मिल सकता है। अब सबकी निगाहें सरकार की आधिकारिक घोषणा और आगामी महीनों में जारी होने वाले अंतिम आंकड़ों पर टिकी हुई हैं।

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