कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय, आज इस्तीफा देंगे सिद्धारमैया; डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री
- कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लगेगी अंतिम मुहर, मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल के संकेत
- ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर हुआ नेतृत्व परिवर्तन, सरकार विरोधी माहौल कम करने की रणनीति
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच अब सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज दोपहर तीन बजे अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित अपने आवास पर उन्होंने मंत्रियों के साथ विशेष नाश्ता बैठक आयोजित की, जिसमें उन्होंने अपने फैसले की जानकारी दी। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान का एक भावुक दृश्य भी चर्चा का विषय बना, जब डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छुए और इसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें गले लगा लिया। इस घटनाक्रम को कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की औपचारिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। कर्नाटक सरकार में मंत्री एचके पाटिल ने संकेत दिया है कि बैठक में डीके शिवकुमार के नाम पर सहमति बन गई है और वही राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उन्हें औपचारिक रूप से विधायक दल का नेता चुना जाएगा। इसके बाद कांग्रेस राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेगी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के लिए समय भी मांगा था, लेकिन राज्यपाल पारिवारिक कारणों से फिलहाल बेंगलुरु से बाहर बताए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री अपना लिखित इस्तीफा राजभवन कार्यालय को सौंप सकते हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार राज्यपाल की अनुपस्थिति में भी मुख्यमंत्री ई-मेल या लिखित माध्यम से इस्तीफा दे सकते हैं। इस्तीफा स्वीकार होने तक वर्तमान मुख्यमंत्री ही कार्यवाहक रूप में पद पर बने रहते हैं। कांग्रेस के भीतर यह नेतृत्व परिवर्तन कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं माना जा रहा। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद ही मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान सामने आ गई थी। उस समय कांग्रेस नेतृत्व, खासकर राहुल गांधी की मध्यस्थता के बाद कथित रूप से ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री फार्मूले पर सहमति बनी थी। अब सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही डीके शिवकुमार समर्थक विधायकों का दबाव बढ़ गया था। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व को यह महसूस हो रहा था कि समय रहते नेतृत्व परिवर्तन नहीं किया गया तो सरकार के खिलाफ बन रहा माहौल आगामी चुनावों में नुकसान पहुंचा सकता है। वाल्मीकि विकास निगम घोटाले समेत कुछ अन्य मामलों को लेकर सिद्धारमैया सरकार विपक्ष के निशाने पर रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व बदलाव के जरिए सरकार विरोधी माहौल को कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। नई सरकार के गठन के साथ मंत्रिमंडल में भी बड़े बदलाव होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक वर्तमान मंत्रिमंडल के लगभग 15 से 20 मंत्रियों को बदला जा सकता है। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया जा रहा है कि 35 मंत्रियों में से करीब 25 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। कांग्रेस सामाजिक और जातीय संतुलन साधने के लिए दो उपमुख्यमंत्री पद भी बना सकती है। इनमें एक पद दलित समुदाय के नेता और दूसरा लिंगायत या अन्य पिछड़ा वर्ग के नेता को दिए जाने की चर्चा है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र को मंत्री बनाए जाने के बाद कांग्रेस भी इसी तरह का प्रयोग कर सकती है। सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया के पुत्र को भी नई सरकार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। दिल्ली में मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लगभग छह घंटे तक चली बैठक के बाद ही नेतृत्व परिवर्तन पर अंतिम सहमति बनी। 26 मई को दोनों नेता दिल्ली पहुंचे थे, जहां विस्तृत मंथन के बाद सत्ता हस्तांतरण की रूपरेखा तय की गई। कर्नाटक की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि कांग्रेस की आगामी रणनीति का भी अहम हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी अब नए चेहरे और नए समीकरणों के जरिए राज्य में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने की कोशिश में जुटी है। आने वाले दिनों में नई कैबिनेट के गठन और विभागों के बंटवारे पर पूरे देश की नजर रहेगी।


