मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, युद्धविराम बढ़ाने के साथ अमेरिका-ईरान टकराव गहराया

  • इजराइल-लेबनान संघर्ष में अस्थायी राहत, लेकिन हॉर्मुज और प्रतिबंधों पर बढ़ी तनातनी
  • ईरान की चेतावनी, अमेरिकी सैन्य रणनीति और राजनीतिक दबाव से जटिल हुई स्थिति

नई दिल्ली। अमेरिका और मध्य पूर्व के बीच जारी तनाव के बीच एक ओर जहां इजराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान को लेकर हालात और जटिल होते जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद यह घोषणा की और संकेत दिया कि जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को वार्ता के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता तभी संभव होगा, जब वह अमेरिका के हितों के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि इस विषय पर कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है और जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं किया जाएगा, क्योंकि पारंपरिक हमलों से ही उसे पर्याप्त नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इसी बीच अमेरिकी सेना को हॉर्मुज क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रहे छोटे जहाजों को निष्क्रिय करने का निर्देश दिया गया है। भारत सरकार ने भी मौजूदा हालात को देखते हुए अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सलाह दी है। वहीं ईरान ने पहली बार हॉर्मुज में गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति और जटिल तब हो गई जब अमेरिका ने नाटो देशों की कथित “अच्छी और बुरी” सूची तैयार की। इसमें उन देशों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है, जिन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ दिया या नहीं दिया। पोलैंड और रोमानिया को सहयोगी देशों के रूप में सूची में स्थान दिया गया, जबकि कई अन्य देशों को नकारात्मक श्रेणी में रखा गया है। ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका और इजराइल पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब तक ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी, तब तक वास्तविक युद्धविराम संभव नहीं है। उन्होंने हॉर्मुज को दोबारा खोलने की संभावना को भी खारिज कर दिया। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि देश की जमी हुई संपत्तियों को जारी नहीं किया गया, तो हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रह सकता है और मौजूदा युद्धविराम भी टूट सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियां विभिन्न देशों में प्रतिबंधों के कारण फंसी हुई हैं, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। अमेरिकी सैन्य रणनीति को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने बड़ी संख्या में लंबी दूरी की मिसाइलों का उपयोग किया है, जिससे उसके हथियार भंडार में कमी आई है। इन हथियारों को एशिया और यूरोप से हटाकर मध्य पूर्व में तैनात किया जा रहा है, जिससे अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक स्तर पर भी ट्रंप पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी संविधान के अनुसार किसी भी युद्ध को 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी आवश्यक होती है। ऐसे में ट्रंप प्रशासन पर यह दबाव है कि वह निर्धारित समयसीमा से पहले स्थिति को नियंत्रित करे। विशेषज्ञों का मानना है कि यही कारण है कि ट्रंप बार-बार युद्धविराम की अवधि बढ़ाने और वार्ता की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी नई जानकारियां सामने आई हैं। भले ही उसके बड़े युद्धपोतों को नुकसान पहुंचा हो, लेकिन उसके पास अब भी हजारों तेज रफ्तार छोटी नावें मौजूद हैं, जो सामूहिक हमलों में प्रभावी साबित हो सकती हैं। इससे हॉर्मुज क्षेत्र में खतरा बना हुआ है। मध्य पूर्व में मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य और राजनीतिक दबाव स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या वार्ता के जरिए इस संकट का समाधान निकलता है या तनाव और बढ़ता है।

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