सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुविधा बढ़ाने के लिए नई व्यवस्था, स्ट्रेचर और व्हील चेयर अनिवार्य

  • स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को जारी किए निर्देश, अस्पतालों में उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर
  • आपात स्थिति में मरीजों के सुरक्षित स्थानांतरण पर फोकस, अतिरिक्त उपकरण रखने की भी सलाह

पटना। राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने एक नई दिशा-निर्देशिका जारी की है। इस पहल के तहत अस्पतालों में स्ट्रेचर, रोगी ट्रॉली और व्हील चेयर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी निर्देश सभी जिलों के असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारियों को भेजे गए हैं। इनमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अस्पतालों में उनकी क्षमता के अनुरूप आवश्यक संख्या में स्ट्रेचर और व्हील चेयर उपलब्ध होना अनिवार्य है। विभाग का मानना है कि गंभीर, घायल या चलने में असमर्थ मरीजों के लिए इन उपकरणों की उपलब्धता बेहद जरूरी है, क्योंकि इनके माध्यम से मरीजों को सुरक्षित और आरामदायक तरीके से स्थानांतरित किया जा सकता है। निर्देश में यह भी बताया गया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में इन उपकरणों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मरीजों को एंबुलेंस से वार्ड, ऑपरेशन कक्ष, गहन चिकित्सा कक्ष, एक्स-रे कक्ष या पैथोलॉजी प्रयोगशाला तक पहुंचाने में स्ट्रेचर और व्हील चेयर का उपयोग आवश्यक है। यदि समय पर ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती हैं, तो मरीज के उपचार के शुरुआती महत्वपूर्ण समय, जिसे चिकित्सकीय भाषा में स्वर्णिम समय कहा जाता है, पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार और वाहन पार्किंग क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर और व्हील चेयर उपलब्ध रहें। इसका उद्देश्य यह है कि एंबुलेंस से आने वाले मरीजों को तुरंत अस्पताल के भीतर ले जाया जा सके और उपचार में किसी प्रकार की देरी न हो। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि उपकरणों की कमी के कारण मरीजों के परिजनों को उन्हें उठाकर ले जाने जैसी असुरक्षित स्थिति से बचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों को उनकी कुल बेड क्षमता और मरीजों की संख्या के आधार पर उपकरणों की संख्या तय करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही कुल आवश्यकता के अतिरिक्त कम से कम 10 प्रतिशत उपकरण अतिरिक्त रूप से सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति में उनका उपयोग किया जा सके। यह अतिरिक्त व्यवस्था आपातकालीन दबाव के समय मरीजों की सुविधा सुनिश्चित करने में सहायक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की व्यवस्था लागू होने से सरकारी अस्पतालों में मरीजों के अनुभव में सुधार आएगा। अक्सर देखा जाता है कि उपकरणों की कमी के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। नई व्यवस्था से इस समस्या का समाधान होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करें। यदि किसी अस्पताल में इन उपकरणों की कमी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह पहल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे मरीजों को न केवल बेहतर सुविधा मिलेगी, बल्कि उपचार प्रक्रिया भी अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो सकेगी।

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