February 23, 2026

कल्कि धाम वाले आचार्य प्रमोद कृष्णन को मिली जगद्गुरु की उपाधि, बिहार में अजीत शुक्ला समेत गणमान्य लोगों ने दी बधाई

पटना। देश के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में से एक कल्कि धाम और उससे जुड़े संतों एवं अनुयायियों के बीच हाल ही में एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक घोषणा ने श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया है। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज को देश के महान संतों द्वारा “जगद्गुरु” की उपाधि प्रदान किए जाने पर बिहार सहित पूरे देश के श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस अवसर पर बिहारवासियों की ओर से आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी गई हैं।धार्मिक और आध्यात्मिक जगत में “जगद्गुरु” की उपाधि अत्यंत सम्मानित और प्रतिष्ठित मानी जाती है। यह उपाधि उन संतों और आध्यात्मिक गुरुओं को प्रदान की जाती है, जिन्होंने समाज के उत्थान, धर्म के प्रचार-प्रसार और मानवता की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज लंबे समय से सनातन धर्म के प्रचार, आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके प्रवचनों और आध्यात्मिक मार्गदर्शन से देश और विदेश में लाखों लोग प्रभावित हुए हैं। इस अवसर पर बिहार के अधिवक्ता और पटना उच्च न्यायालय से जुड़े अजीत कुमार शुक्ला, जो कल्कि धाम के संस्थापक सदस्य और बिहार, उड़ीसा, झारखंड और बंगाल के क्षेत्र प्रचारक भी हैं, ने आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज को “जगद्गुरु” घोषित किए जाने पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे बिहार और पूरे देश के लिए गर्व का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज का जीवन समाज सेवा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा है। अजीत कुमार शुक्ला ने कहा कि कल्कि धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभर रहा है, जहां लोगों को धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिकता के बारे में गहन ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे इस पवित्र कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने पूर्वजों के नाम पर शिलापट दान करके इस आध्यात्मिक आंदोलन का हिस्सा बनें। इस घोषणा के साथ ही कल्कि धाम से जुड़े श्रद्धालुओं और समर्थकों ने लोगों से अपील की है कि वे अपने पूर्वजों के नाम पर कल्कि धाम में शिलापट दान करें। इस पहल का उद्देश्य लोगों को अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर देना और साथ ही एक पवित्र धार्मिक स्थल के निर्माण और विकास में योगदान देना है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रकार का दान न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने का भी कार्य करता है। इस पहल के माध्यम से लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और आध्यात्मिक चेतना को विकसित करने का अवसर मिलेगा। श्रद्धालुओं के बीच इस अभियान को लेकर व्यापक उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग इस कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की पहल समाज में आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों को अपनी परंपराओं के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज को “जगद्गुरु” की उपाधि मिलने से उनके अनुयायियों और श्रद्धालुओं का मनोबल और भी मजबूत हुआ है। इस घोषणा के बाद बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं द्वारा बधाई संदेश और शुभकामनाएं भेजी जा रही हैं। कल्कि धाम से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह केंद्र देश और दुनिया के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में अपना विशेष स्थान बनाएगा और समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान करता रहेगा।

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