पटना में साइबर ठगी का बढ़ता जाल, कई लोगों के खातों से लाखों की निकासी

  • पटना में पोती ने दादा के खाते से 35 लाख रुपये निकाले, साइबर थाने में मामला दर्ज
  • परिवार के भीतर से लेकर फर्जी कॉल और लिंक तक, अलग-अलग तरीकों से हो रही ठगी
  • साइबर थानों में बढ़ रही शिकायतें, लोगों से सतर्क रहने की अपील

पटना। राजधानी पटना में साइबर अपराध के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे आम लोगों की मेहनत की कमाई पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। बीते कुछ समय में अलग-अलग इलाकों से कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये की अवैध निकासी कर ली गई। अपराधियों ने ठगी के लिए रिश्तों का दुरुपयोग, मोबाइल फोन छीनने की घटनाएं, फर्जी सदस्यता सक्रिय करने का झांसा, और निवेश के नाम पर लालच देने जैसे कई नए तरीके अपनाए हैं। इन घटनाओं ने न केवल लोगों की आर्थिक सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब साइबर सुरक्षा को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है।
परिवार के भीतर से भी हो रही ठगी
साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला पत्रकारनगर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग व्यक्ति के बैंक खाते से करीब 35 लाख रुपये की निकासी कर ली गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इस मामले में आरोप उनकी अपनी पोती पर लगा है। जानकारी के अनुसार, जब पीड़ित को खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली, तब उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। यह घटना दर्शाती है कि अब साइबर अपराध केवल अजनबियों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परिवार के भीतर भी वित्तीय जानकारी के दुरुपयोग की घटनाएं सामने आने लगी हैं। इस तरह के मामले लोगों को अपनी निजी वित्तीय जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतने की सीख देते हैं।
मोबाइल झपटमारी के बाद बैंक खाते से बड़ी निकासी
गोपालपुर थाना क्षेत्र के मनोहरपुर कछुआरा निवासी एक व्यक्ति के साथ हुई घटना ने मोबाइल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार, फतुहा इलाके में उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया, जिसके बाद अपराधियों ने मोबाइल में मौजूद बैंक संबंधी जानकारी का उपयोग कर उनके खाते से लगभग 18 लाख रुपये निकाल लिए। इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि मोबाइल फोन केवल बातचीत का साधन नहीं रह गया है, बल्कि इसमें बैंकिंग और भुगतान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी सुरक्षित रहती है। ऐसे में मोबाइल की सुरक्षा में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान करा सकती है।
फर्जी कॉल और लिंक से ठगी का बढ़ता खतरा
अगमकुआं क्षेत्र के निवासी एक व्यक्ति को फोन कर ठगों ने स्वयं को एक विमान सेवा कंपनी का प्रतिनिधि बताया और विशेष सदस्यता कार्ड सक्रिय करने का झांसा दिया। ठगों ने उन्हें एक लिंक भेजा और उस पर जाकर अपनी जानकारी भरने के लिए कहा। जैसे ही पीड़ित ने लिंक खोलकर विवरण भरा, उनके खाते से लगभग 3 लाख रुपये निकाल लिए गए। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि अपराधी अब लोगों को झूठे प्रस्ताव और आकर्षक योजनाओं का लालच देकर फर्जी वेबसाइट या लिंक के माध्यम से उनकी गोपनीय जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।
निवेश के नाम पर लालच देकर ठगी
कंकड़बाग क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर अधिक लाभ का लालच दिया गया। ठगों ने उन्हें विश्वास में लेकर धीरे-धीरे उनसे धन हस्तांतरित करवाया और बाद में संपर्क समाप्त कर दिया। इस तरह करीब 1 लाख 14 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। इसी प्रकार महेंद्रू क्षेत्र के एक अन्य व्यक्ति के खाते से भी लगभग डेढ़ लाख रुपये की निकासी कर ली गई। हालांकि इस मामले में ठगी का तरीका स्पष्ट नहीं हो सका, लेकिन यह साफ है कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
साइबर थानों में बढ़ रही शिकायतें
लगातार सामने आ रहे मामलों के कारण साइबर थानों में शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, संदेश या लिंक पर भरोसा न करें। बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी जैसे खाता संख्या, ओटीपी, पासवर्ड या एटीएम पिन किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल फोन में मजबूत पासवर्ड या स्क्रीन लॉक रखना भी आवश्यक है, ताकि फोन खो जाने या चोरी होने की स्थिति में जानकारी सुरक्षित रह सके।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन लेनदेन का उपयोग बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ रही है। इसलिए लोगों को तकनीक का उपयोग करते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। किसी भी प्रकार के लालच, दबाव या डर के कारण जल्दबाजी में निर्णय नहीं लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक अधिकारी, कंपनी प्रतिनिधि या सरकारी कर्मचारी बनकर जानकारी मांगता है, तो पहले उसकी सत्यता की जांच करना जरूरी है।
साइबर सुरक्षा बन चुकी है जरूरत
पटना में लगातार सामने आ रहे साइबर अपराध के मामले यह संकेत देते हैं कि अब साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आम लोगों की दैनिक जरूरत बन चुकी है। थोड़ी सी सतर्कता और जागरूकता से इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकता है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो अपराधियों के हौसले और बढ़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते समय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।