सफेद क्रांति को लेकर सीएम नीतीश का बड़ा ऐलान, हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का होगा गठन
पटना। बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के इरादे से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा ऐलान किया है। सात निश्चय-3 के तहत राज्य के हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति के गठन का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे कृषि और पशुपालन के क्षेत्र में प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि इससे न केवल पशुपालकों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि गांवों की आर्थिक तस्वीर भी बदलेगी। इस फैसले को प्रशासनिक पहल के साथ-साथ सियासी रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।
सात निश्चय-3 के तहत बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय-3 के तीसरे संकल्प “कृषि में प्रगति, प्रदेश में समृद्धि” के तहत यह घोषणा की है। उनका कहना है कि दुग्ध उत्पादन समितियों के जरिए पशुपालकों को संगठित किया जाएगा, जिससे दूध की खरीद, बिक्री और भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी होगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सकेगा।
सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि बिहार के कुल 39,073 गांवों में से अब तक 25,593 गांवों में दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन किया जा चुका है। शेष गांवों में अगले दो वर्षों के भीतर समितियां गठित करने का निर्देश पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को दिया गया है। सरकार का दावा है कि इस समयबद्ध योजना से डेयरी सेक्टर को राज्यव्यापी मजबूती मिलेगी।
पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि दुग्ध उत्पादन समितियों के विस्तार से पशुपालकों को दूध का उचित और स्थिर मूल्य मिलेगा। अब दूध केवल पोषण का साधन नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण आय का मजबूत स्रोत बनेगा। समितियों के माध्यम से दूध की खरीद सीधे किसानों से की जाएगी, जिससे नकद प्रवाह बढ़ेगा और ग्रामीण बाजारों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
सुधा नेटवर्क का विस्तार
सात निश्चय-2 के तहत पहले ही राज्य के सभी प्रखंडों में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोले जा चुके हैं। अब सात निश्चय-3 के अंतर्गत इसे और आगे बढ़ाते हुए हर पंचायत में सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र खोलने का लक्ष्य तय किया गया है। वर्तमान में बिहार की 8053 पंचायतों में से 100 पंचायतों में ये केंद्र कार्यरत हैं। शेष 7953 पंचायतों में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंत तक केंद्र खोलने की योजना है।
महिला सशक्तिकरण पर खास जोर
इस योजना का एक अहम पहलू महिला रोजगार से जुड़ा है। नए सुधा दुग्ध बिक्री केंद्रों का आवंटन मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत जीविका दीदियों को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे और वे डेयरी व्यवसाय से सीधे जुड़ सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता मजबूत होगी।
ग्रामीण रोजगार और पलायन पर असर
सरकार का दावा है कि डेयरी सेक्टर के विस्तार से गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। दूध संग्रहण, परिवहन, बिक्री और प्रसंस्करण से जुड़े कामों में युवाओं को रोजगार मिलेगा। इससे रोजगार की तलाश में होने वाला पलायन भी कम हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए स्रोत बनने से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
सियासी मायने भी अहम
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह योजना केवल आर्थिक सुधार तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में पशुपालक, महिलाएं और छोटे किसान एक बड़ा वोट बैंक माने जाते हैं। दुग्ध उत्पादन समितियों और सुधा नेटवर्क के जरिए सरकार इस वर्ग से सीधा जुड़ाव बनाना चाहती है। इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी एक अहम कदम माना जा रहा है।
जमीन पर असर पर टिकी निगाहें
हालांकि इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है। समितियों का सही संचालन, समय पर भुगतान और पारदर्शिता बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। अगर इन पहलुओं पर सही तरीके से काम हुआ, तो यह योजना सचमुच बिहार में सफेद क्रांति की नई शुरुआत बन सकती है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह फैसला ग्रामीण विकास, पशुपालन और महिला सशक्तिकरण को एक साथ जोड़ने की कोशिश है। अब आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह पहल केवल घोषणा तक सीमित रहती है या वास्तव में बिहार के गांवों में समृद्धि का रास्ता खोलती है।


