बिहार में बदला मौसम का मिजाज, समय से पहले मानसून की दस्तक के संकेत
- केरल में 25 से 27 मई तक मानसून पहुंचने की संभावना, बिहार में 8 से 10 जून के बीच आगमन का अनुमान
- आंधी, बारिश और वज्रपात से बढ़ी चिंता, मई के पहले पखवाड़े में सामान्य से तीन गुना अधिक वर्षा दर्ज
पटना। बिहार में इस वर्ष मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। जहां मई के महीने में आमतौर पर भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिलता है, वहीं इस बार लगातार आंधी, बारिश और ठंडक ने लोगों को हैरान कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य समय से लगभग चार दिन पहले बिहार पहुंच सकता है। सामान्यतः बिहार में मानसून 12 से 15 जून के बीच प्रवेश करता है, लेकिन इस वर्ष इसके 8 से 10 जून के बीच आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं केरल में मानसून के 1 जून तक पहुंचने के बजाय 25 से 27 मई के बीच दस्तक देने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के लिए अनुकूल परिस्थितियां तेजी से बन रही हैं। इस सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंच सकता है। बिहार में बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून सबसे पहले किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार, अररिया, सुपौल और भागलपुर जैसे जिलों में बारिश करता है, जिसके बाद यह पूरे राज्य में फैलता है। हालांकि मानसून के जल्दी आने की संभावना के बावजूद इस वर्ष भी बिहार में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया गया है। राज्य में मानसून के दौरान औसत वर्षा 992.2 मिलीमीटर मानी जाती है, लेकिन वर्ष 2021 के बाद से लगातार कम वर्षा दर्ज की जा रही है। इसके विपरीत प्री-मानसून अवधि में इस बार 193 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। मई महीने में सामान्यतः 37.8 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए, जबकि इस बार अब तक औसतन 111 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। मई के शुरुआती दस दिन पिछले बीस वर्षों में सबसे ठंडे माने जा रहे हैं। पटना का औसत तापमान 32.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सुबह और शाम का मौसम नवंबर जैसा महसूस हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार अप्रैल में केवल एक बार गरज-चमक की स्थिति बनी, लेकिन मई में लू की स्थिति नहीं बनी। इसके बजाय तेज हवा, गरज, बिजली गिरने और बारिश की घटनाएं अधिक देखने को मिलीं। आंधी और बारिश ने राज्य में भारी तबाही भी मचाई है। 4 और 5 मई को वज्रपात से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 12 मई को भी पांच लोगों की जान बिजली गिरने से चली गई। वर्ष 2025 में 10 अप्रैल को हुई तेज बारिश और वज्रपात के कारण 61 लोगों की मौत हुई थी। नालंदा जिला सबसे अधिक प्रभावित हुआ था। बिहार में बीते वर्षों में अत्यधिक बारिश के कई उदाहरण सामने आए हैं। 28 मई 2021 को कटिहार के मनिहारी में 251.6 मिलीमीटर, पश्चिम चंपारण के त्रिवेणी वाल्मीकि क्षेत्र में 215 मिलीमीटर और पूर्णिया में 212.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई थी। उसी वर्ष पटना में 24 घंटे के भीतर 145 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जिससे राजेंद्र नगर, कंकड़बाग और पाटलिपुत्र जैसे इलाके जलमग्न हो गए थे। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों को राहत कार्य में लगाना पड़ा था। मौसम विभाग ने 17 मई तक राज्य में गर्मी से राहत बने रहने की संभावना जताई है। इस दौरान आंधी और बारिश जारी रह सकती है। उत्तर बिहार के लिए नारंगी चेतावनी और दक्षिण बिहार के लिए पीली चेतावनी जारी की गई है। उत्तर बिहार में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तथा दक्षिण बिहार में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने की आशंका है। साथ ही वज्रपात का भी खतरा बना हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों तथा पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है। बिहार में मौसम का यह बदला हुआ स्वरूप आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।


