पटना में परिचारी संघ के सदस्यों का जोरदार प्रदर्शन, जदयू कार्यालय का किया घेराव, सीएम से मुलाकात की रखी मांग
पटना। राजधानी पटना में सोमवार को बिहार राज्य परिचारी संघ के सदस्यों ने जदयू कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार ने वर्ष 2024 में बहाली परीक्षा तो आयोजित कराई थी, लेकिन उसका पूरा परिणाम अब तक घोषित नहीं किया गया। इस कारण हजारों अभ्यर्थी असमंजस और अनिश्चितता की स्थिति में फंसे हुए हैं।
अधूरे परिणाम पर नाराजगी
परिचारी संघ के सदस्यों ने आरोप लगाया कि बहाली परीक्षा का परिणाम केवल कुछ ही उम्मीदवारों के लिए घोषित किया गया। जानकारी के अनुसार, अब तक मात्र 10 से 20 अभ्यर्थियों का परिणाम सामने आया है, जबकि शेष उम्मीदवारों को कोई सूचना नहीं मिली। इससे अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है और उनकी नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
लंबे समय से सेवा देने वाले कर्मचारी
परिचारी संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि वे वर्ष 2012 से लगातार काम कर रहे हैं। इतने लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उनकी नौकरी स्थायी नहीं की गई है। इसके अलावा उन्हें नियमित वेतन, सेवा सुरक्षा और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उनका कहना है कि वे अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार योगदान देते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक उचित मान्यता और स्थिरता नहीं मिली।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से उन्हें कई बार आश्वासन तो दिया गया, लेकिन उन वादों को आज तक पूरा नहीं किया गया। उनके अनुसार, समय-समय पर सरकार द्वारा स्थायीकरण और वेतनमान से जुड़ी बातें कही जाती रहीं, परंतु व्यावहारिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण कर्मचारियों का आक्रोश धीरे-धीरे बढ़ता गया और अब उन्होंने सड़क पर उतरकर विरोध जताने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों की एक मुख्य मांग यह भी रही कि वे सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों से उन्हें अवगत कराना चाहते हैं। उनका मानना है कि यदि मुख्यमंत्री स्वयं उनकी स्थिति को समझेंगे, तो शायद समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सकेगी। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अब वे केवल आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगे, बल्कि लिखित और स्पष्ट निर्णय चाहते हैं।
विरोध प्रदर्शन का सिलसिला
यह पहला मौका नहीं है जब परिचारी संघ के सदस्य इस प्रकार का विरोध कर रहे हों। बीते सप्ताह भी उन्होंने जदयू कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। उस दौरान स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि पुलिस और कर्मचारियों के बीच धक्का-मुक्की और नोकझोंक होने लगी। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद मामला शांत हुआ। इस घटना के बाद कर्मचारियों का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने सोमवार को फिर से जदयू कार्यालय का घेराव किया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
परिचारी संघ के सदस्य राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का अहम हिस्सा हैं। ये कर्मचारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल से लेकर विभिन्न दवाइयों और उपकरणों के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। उनकी असंतुष्टि और लगातार चल रहे विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं निकला, तो अस्पतालों में मरीजों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार के लिए चुनौती
सरकार के लिए यह स्थिति किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। एक ओर उसे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की मांगों को भी सुनना और उनका समाधान करना है। यदि समस्या लंबे समय तक टली, तो यह न केवल राजनीतिक तौर पर सरकार के लिए मुश्किल पैदा करेगी, बल्कि स्वास्थ्य तंत्र पर भी भारी दबाव डाल सकती है। पटना में जदयू कार्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मुद्दों की गंभीरता को उजागर करता है। परिचारी संघ के सदस्य वर्षों से सेवा दे रहे हैं, फिर भी उन्हें स्थायित्व और उचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद की कमी ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी सरकार इस समस्या का समाधान किस तरह से निकालते हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है और इसका सीधा असर जनता पर पड़ना तय है।


