बिहार के जेलों में कैदियों के लिए लगेंगे टीवी, सरकार का निर्देश जारी, खर्च होंगे 3.27 करोड रुपए

पटना। पटना से आई ताज़ा खबर के अनुसार बिहार सरकार ने राज्य की जेलों में बंद कैदियों के लिए एक नई सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। अब जेलों के कैदियों को मनोरंजन और जानकारी के साधन के रूप में रंगीन टीवी की सुविधा मिलेगी। सरकार इस योजना पर कुल 3.27 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। गृह विभाग की स्थायी वित्त समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और इसके तहत कुल 681 रंगीन टीवी खरीदे जाएंगे। प्रत्येक टीवी की अनुमानित लागत 48 हजार रुपये तय की गई है और खरीद की पूरी प्रक्रिया “जेम पोर्टल” के माध्यम से की जाएगी, ताकि पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। गृह विभाग (कारा) के संयुक्त सचिव सह निदेशक संजीव जमुआर की ओर से जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि उच्च सुरक्षा कक्ष और विशेष प्रकोष्ठ को छोड़कर शेष सभी बंदी वार्डों में यह सुविधा दी जाएगी। अगर हम वितरण की बात करें तो सबसे अधिक 49 टीवी पूर्णिया केंद्रीय कारा में लगाए जाएंगे, जिस पर लगभग 23.52 लाख रुपये का खर्च आएगा। इसके अलावा दरभंगा मंडल कारा और सहरसा मंडल कारा में 29-29 टीवी लगाए जाएंगे। मधुबनी में 24, जहानाबाद में 20, दाउदनगर उपकारा में 22, आरा मंडल कारा में 18, कटिहार में 16, उदाकिशुनगंज में 14 और शेरघाटी में 12 टीवी लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं गया केंद्रीय कारा और जमुई मंडल कारा को 13-13, मुंगेर को 19 और भागलपुर विशेष केंद्रीय कारा को 17 टीवी दिए जाएंगे। इस प्रकार पूरे बिहार की 49 जेलों में टीवी की सुविधा कैदियों को उपलब्ध होगी। सरकार का मानना है कि टीवी से कैदियों को मनोरंजन के साथ-साथ जानकारी और शिक्षाप्रद सामग्री देखने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका मानसिक तनाव कम होगा और जेल का वातावरण अपेक्षाकृत सकारात्मक बनेगा। इसके अतिरिक्त, जेलों में साफ-सफाई और स्वच्छता की स्थिति बेहतर करने के लिए भी एक बड़ा कदम उठाया गया है। गृह विभाग ने 105 हाई प्रेशर जेट क्लीनर मशीनें खरीदने की स्वीकृति दी है। इन मशीनों पर कुल 1.26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। प्रत्येक मशीन की कीमत 1.20 लाख रुपये तय की गई है। इन्हें राज्य की 59 जेलों में उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का यह निर्णय जेल सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल कैदियों को मानसिक सुकून मिलेगा बल्कि जेल प्रशासन के लिए भी एक अनुशासित और साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखना आसान होगा। साफ-सफाई की बेहतर व्यवस्था और मनोरंजन के साधन कैदियों के पुनर्वास की प्रक्रिया को भी सहायक सिद्ध हो सकते हैं। कुल मिलाकर, बिहार सरकार ने इस पहल के माध्यम से जेलों को केवल दंड का स्थान न मानकर उन्हें सुधार और पुनर्वास केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश की है। यह कदम आने वाले समय में कैदियों के जीवन और सोच में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

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