नीतीश और नायडू के लिए केंद्र लाई नया बिल, जल्द गिरफ्तार कर छिनेगी कुर्सी: तेजस्वी यादव

पटना। बिहार की राजनीति इस समय पूरी तरह से गरमाई हुई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव इन दिनों पूरे बिहार में “वोट अधिकार यात्रा” निकाल रहे हैं। गुरुवार को एक दिन के विराम के बाद यह यात्रा फिर से शुरू हुई। इस क्रम में तेजस्वी यादव पटना से शेखपुरा, सिकंदरा, जमुई और मुंगेर के लिए रवाना हुए। यात्रा पर निकलने से पहले पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी ने केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर बड़ा हमला बोला।तेजस्वी यादव ने लोकसभा में पेश किए गए 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह बिल विशेष रूप से नीतीश कुमार और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जैसे नेताओं को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। तेजस्वी के अनुसार, केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने और उन्हें ब्लैकमेल करने की राजनीति कर रही है। उनका आरोप था कि “देश को आगे बढ़ाने की बजाय यह सरकार लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रही है। बिल की मुख्य प्रावधानों की बात करें तो इसमें यह कहा गया है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री लगातार 30 दिनों तक हिरासत में या जेल में रहता है तो 31वें दिन उसकी कुर्सी स्वतः छिन जाएगी। विपक्ष का कहना है कि इस प्रावधान का इस्तेमाल चुनिंदा नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जाएगा। तेजस्वी यादव ने इसी संदर्भ में नीतीश कुमार और नायडू का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कानून सीधे तौर पर ऐसे नेताओं के लिए बनाया गया है। पत्रकारों द्वारा नीतीश कुमार के भविष्य से जुड़े सवाल पर तेजस्वी ने कहा कि बिहार की जनता अब मन बना चुकी है। उनके अनुसार, नीतीश कुमार का समय समाप्त हो गया है और आने वाले चुनाव में जनता उन्हें सत्ता से बाहर करेगी। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध, शिक्षा व्यवस्था की बदहाली और पलायन की समस्या का हवाला देते हुए नीतीश सरकार को पूरी तरह विफल बताया। तेजस्वी यादव ने अपनी वोट अधिकार यात्रा पर जोर देते हुए कहा कि इस अभियान को जनता का भारी समर्थन मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस यात्रा ने चुनाव आयोग और भाजपा की “सच्चाई” लोगों के सामने ला दी है। वहीं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा अल्पसंख्यक समाज से संवाद कार्यक्रम की घोषणा पर भी उन्होंने तंज कसा और कहा कि अब ऐसे प्रयासों का कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि जनता ने पहले ही मन बना लिया है। कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में यह नया बिल बड़ा विवाद पैदा कर रहा है। जहां केंद्र सरकार इसे जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में एक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक हथियार मान रहा है। तेजस्वी यादव के बयान से यह साफ है कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर बिहार की राजनीति और भी तीखी होने वाली है।

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