तेजप्रताप यादव का राजद विधायक भाई वीरेंद्र पर हमला, कहा- बैलवा ने हमको बाहर करवाया, नाथने का काम कीजिए
पटना। बिहार की राजनीति हमेशा से अपने बयानों, विवादों और सियासी खींचतान को लेकर सुर्खियों में रही है। हाल ही में इसी सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और हसनपुर के विधायक तेजप्रताप यादव ने मनेर से राजद विधायक भाई वीरेंद्र पर सीधा हमला बोला। मनेर में आयोजित एक रोड शो के दौरान तेजप्रताप ने नाम लिए बिना, लेकिन बेहद तीखे शब्दों में भाई वीरेंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने उन्हें ‘बैलवा’ कहकर संबोधित किया और जनता से अपील की कि इस ‘बैलवा’ को नाथने का काम करें। तेजप्रताप यादव ने अपने भाषण में कहा कि भाई वीरेंद्र ही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने उन्हें संगठन से बाहर करवाने की साजिश रची। उन्होंने जनता से आह्वान करते हुए कहा कि जैसे भगवान कृष्ण ने कालिया नाग को वश में किया था, उसी तरह मनेर की जनता को इस बेलगाम ‘बैलवा’ को नियंत्रित करना चाहिए। तेजप्रताप का यह बयान न केवल व्यक्तिगत हमला था, बल्कि यह राजद के भीतर बढ़ती गुटबाजी की ओर भी इशारा करता है। दरअसल, कुछ समय पहले मनेर के एक पंचायत सचिव और विधायक भाई वीरेंद्र की बातचीत का ऑडियो क्लिप सामने आया था। उस बातचीत में कथित रूप से दलित और पिछड़े वर्गों के प्रति अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। तेजप्रताप यादव ने इस मामले को भी उठाया और सोशल मीडिया पर सवाल किया कि जब उन्हें पार्टी से बाहर किया गया, तो क्या उसी तरह भाई वीरेंद्र पर भी कार्रवाई की जाएगी? उन्होंने कहा कि संविधान और बाबा साहेब आंबेडकर के आदर्शों का सम्मान केवल भाषणों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी झलकना चाहिए। तेजप्रताप का यह आक्रामक रुख इस बात का संकेत है कि राजद के भीतर उनका असंतोष गहराता जा रहा है। वह लंबे समय से अपने दल के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाते रहे हैं कि उन्हें हाशिए पर धकेला जा रहा है। कभी संगठन में निर्णय लेने से अलग रखने की शिकायत तो कभी अपने खिलाफ साज़िश रचे जाने का आरोप, तेजप्रताप अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। राजद के भीतर यह बयानबाजी पार्टी की छवि और एकजुटता दोनों पर असर डाल सकती है। एक ओर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव पार्टी को सत्ता में बनाए रखने और संगठन को मजबूत करने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं तेजप्रताप के तीखे बयान भीतरखाने के मतभेदों को उजागर कर रहे हैं। कुल मिलाकर, तेजप्रताप यादव और भाई वीरेंद्र के बीच यह तकरार केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह राजद के अंदरूनी संकट और नेतृत्व संघर्ष की झलक भी देती है। आने वाले समय में यह देखना रोचक होगा कि पार्टी इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है और क्या दोनों नेताओं के बीच सुलह संभव हो पाएगी।


