पटना में अतिक्रमण हटाने में लापरवाही करने पर थानेदार होंगे निलंबित, डीएम ने दी सख्त चेतावनी
पटना। शहर में अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सड़कों, गलियों और प्रमुख मार्गों पर अवैध कब्जे के कारण यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त रहती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की और सख्त चेतावनियां दीं। बैठक में डीएम ने साफ कहा कि अतिक्रमण हटाने के मामले में अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष रूप से थाना प्रभारियों को चेतावनी दी कि यदि उनके क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण पाया गया तो सीधे निलंबन की कार्रवाई होगी। इतना ही नहीं, संबंधित थानेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। डीएम ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि बीते 20 दिनों से चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान केवल तीन अतिक्रमणकारियों पर ही मुकदमा दर्ज किया गया है। यह संख्या बेहद निराशाजनक है और इससे यह स्पष्ट होता है कि अभियान केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस तरह की औपचारिक कार्रवाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ने यातायात पुलिस को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने ट्रैफिक एसपी को निर्देश दिया कि वे खुद सड़कों पर उतरकर यातायात व्यवस्था का जायजा लें और सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाएं। डीएम ने कहा कि प्रमुख मार्गों—जैसे नेहरू पथ, जेपी गंगापथ, हवाई अड्डा रोड, अशोक राजपथ और दीघा-आशियाना रोड—को शहर की “लाइफलाइन” माना जाता है। इन सड़कों पर अतिक्रमण होने से पूरा शहर प्रभावित होता है और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। डीएम ने यह भी सवाल उठाया कि जब अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा होता है, तो कई बार पुलिस समय पर मौके पर क्यों नहीं पहुंचती। उन्होंने एडीएम (नगर व्यवस्था) को सख्त निर्देश दिए कि नगर विकास, पुलिस, पथ निर्माण और विद्युत विभाग जैसे सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को प्रभावी बनाया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस बल की लेटलतीफी जारी रही तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई होगी। अंत में जिलाधिकारी ने दोहराया कि अतिक्रमणकारियों के खिलाफ केवल हटाने की औपचारिकता नहीं चलेगी, बल्कि दोबारा कब्जा करने वालों की सूची तैयार कर उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए। प्रशासन का यह रुख साफ है कि शहर में अव्यवस्थित यातायात और अवैध कब्जों के लिए अब किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। इस प्रकार यह बैठक स्पष्ट संकेत देती है कि पटना प्रशासन शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त बनाने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए अब कठोर कदम उठाने जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आम लोगों की सुविधा और शहर की छवि पर देखने को मिलेगा।


