पटना में नीट की तैयारी कर रहे छात्र ने की आत्महत्या, कमरे में लगाई फांसी, सुसाइड नोट बरामद
पटना। बिहार की राजधानी पटना से एक अत्यंत दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है। दक्षिणी शिवपुरी इलाके में नीट (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रहे एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल उसके परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए भी गहरे सदमे की वजह बनी है। आत्महत्या के बाद कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया है, जिससे यह साफ होता है कि छात्र पर मानसिक दबाव था।
16 दिन पहले पटना आया था छात्र
गया जी जिले के मुफ्फसिल थाना अंतर्गत मानपुर के निवासी अजीत कुमार के पुत्र आर्यन राज उर्फ किटू ने पटना में पढ़ाई के लिए कदम रखा था। आर्यन मेडिकल की कठिन परीक्षा नीट की तैयारी कर रहा था और इसके लिए वह पटना के दक्षिणी शिवपुरी स्थित जय विला नामक बिल्डिंग में किराये के कमरे (303 नंबर) में रह रहा था। उसके साथ उसका चचेरा भाई भी रह रहा था, जो उसी की तरह कोचिंग जाता था। आर्यन अपने माता-पिता का सबसे बड़ा बेटा था। परिवार में उससे बड़ी एक बहन और छोटा एक भाई है। उसके पिता व्यवसायी हैं और बेटे की शिक्षा को लेकर गंभीर थे। मगर उन्हें शायद यह अंदेशा नहीं था कि शिक्षा का यह दबाव उनके बेटे को इतना तोड़ देगा।
घटना की रात का विवरण
बताया जा रहा है कि सोमवार की देर रात जब उसका चचेरा भाई कोचिंग से लौटकर कमरे में आया तो उसने आर्यन को पंखे से लटकते देखा। यह दृश्य उसके लिए अत्यंत भयावह था। उसने तुरंत इसकी सूचना शास्त्री नगर पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) की टीम को भी बुलाया गया ताकि तकनीकी जांच की जा सके। पुलिस द्वारा कमरे की तलाशी लेने पर एक सुसाइड नोट बरामद हुआ, जिसमें आर्यन ने अपने परिवार के सदस्यों से खास अपील की थी।
सुसाइड नोट में भावनात्मक अपील
सुसाइड नोट में आर्यन ने अपने माता-पिता, बहन और छोटे भाई को लेकर भावनात्मक बातें लिखीं। उसने अपने मामा जी से यह आग्रह किया कि वे भाई-बहन पर कोई दबाव न डालें। साथ ही अपने माता-पिता से भी यह कहा कि वे खुश रहें और परिवार के बाकी बच्चों को अपने तरीके से जीवन जीने दें। इस पत्र से यह स्पष्ट होता है कि आर्यन किसी मानसिक और पारिवारिक दबाव में था। उसने अपनी असफलता या अपेक्षाओं का बोझ खुद पर इतना ओढ़ लिया कि उसे जीवन समाप्त कर देना ही एकमात्र रास्ता लगा।
पढ़ाई का दबाव या कुछ और
इस घटना ने फिर एक बार यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या देश की प्रतियोगी परीक्षाएं बच्चों पर अत्यधिक दबाव डाल रही हैं? नीट, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं छात्रों की मानसिक स्थिति को किस हद तक प्रभावित कर रही हैं, यह सवाल हर आत्महत्या की घटना के साथ और तीव्र होता जा रहा है। आर्यन की आत्महत्या केवल एक मौत नहीं है, बल्कि यह एक संकेत है कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की ओर अब भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। पढ़ाई के दबाव, प्रतिस्पर्धा, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक मानकों के बोझ ने छात्रों की मानसिक स्थिति को कमजोर कर दिया है।
समाज और परिवार की भूमिका
इस तरह की घटनाओं से यह स्पष्ट हो जाता है कि माता-पिता, अभिभावकों और शिक्षकों को अब बच्चों की मानसिक स्थिति को समझना होगा। सिर्फ अंक, करियर और सफलता पर ध्यान देने से पहले यह जरूरी है कि बच्चों की भावनाओं, डर और परेशानियों को भी सुना जाए। मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आज भी हमारे समाज में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। कई बार बच्चे डर के कारण अपनी परेशानियों को साझा नहीं कर पाते, और जब सहनशक्ति की सीमा टूटती है, तब ऐसे दुर्भाग्यपूर्ण फैसले लिए जाते हैं। आर्यन की आत्महत्या न केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि यह एक सामाजिक चेतावनी भी है। इस घटना से हमें यह सबक लेना चाहिए कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं, बल्कि इंसान के रूप में भी समझा जाए। उनकी भावनाओं, इच्छाओं और परेशानियों को जगह दी जाए। उन्हें सुनना, समझना और उनका मार्गदर्शन करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन चुकी है।


