किशनगंज में एमबीबीएस छात्र की आत्महत्या: हॉस्टल में मिला शव, जांच जारी
किशनगंज। बिहार के किशनगंज जिले में स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज से एक दुखद खबर सामने आई है, जहां एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र सहजप्रीत सिंह ने आत्महत्या कर ली। यह घटना कॉलेज परिसर के बॉयज हॉस्टल में हुई, जिससे पूरे कॉलेज में शोक और सनसनी का माहौल है।
कमरे में बंद मिला छात्र, दरवाजा तोड़ कर निकाला गया बाहर
जानकारी के अनुसार, सहजप्रीत सिंह पंजाब के गुरदासपुर जिले के रनिया का निवासी था और हाल ही में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। वह कॉलेज के बॉयज हॉस्टल में रह रहा था। शुक्रवार को वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकला, जिससे उसके साथियों को शक हुआ। दोपहर तक जब दरवाजा नहीं खुला, तो उसके कमरे के पास रहने वाले छात्र और एक रिश्तेदार ने मिलकर दरवाजा खुलवाया। कमरे के अंदर प्रवेश करने पर छात्र का शव फंदे से लटका मिला, जिसे देख सभी स्तब्ध रह गए।
तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन हो चुकी थी मौत
सहजप्रीत को आनन-फानन में कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही सदर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। अवर निरीक्षक अंकित कुमार सिंह और स्वाति पटेल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने इस मामले में यूडी (अप्राकृतिक मौत) केस दर्ज किया है।
पढ़ाई को लेकर था मानसिक तनाव
कॉलेज के सूत्रों की मानें तो छात्र पिछले कुछ समय से पढ़ाई को लेकर मानसिक रूप से परेशान था। ऐसा बताया जा रहा है कि मेडिकल की पढ़ाई में उसकी रुचि नहीं थी और वह कोर्स को लेकर संघर्ष कर रहा था। छात्र ने कुछ ही दिन पहले कॉलेज में दाखिला लिया था, लेकिन उसे खुद को पढ़ाई के माहौल में ढालना कठिन लग रहा था। यह मानसिक दबाव ही संभवतः आत्महत्या की वजह बना।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्यवाही
किशनगंज सदर एसडीपीओ वन गौतम कुमार ने पुष्टि की कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और विस्तृत जांच के बाद ही आत्महत्या के पीछे के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल इस घटना को लेकर कॉलेज प्रशासन और पुलिस गंभीरता से जांच कर रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक सहयोग की आवश्यकता
यह दुखद घटना उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य और काउंसलिंग सेवाओं की आवश्यकता को रेखांकित करती है। छात्र जीवन में पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगिता और सामाजिक अपेक्षाएं कई बार मानसिक संतुलन को प्रभावित कर देती हैं। कॉलेजों को चाहिए कि वे विद्यार्थियों के लिए समय-समय पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और परामर्श सुविधाएं उपलब्ध कराएं ताकि ऐसी त्रासदियां रोकी जा सकें।


