सुप्रीम कोर्ट से बीपीएससी अभ्यर्थियों को बड़ा झटका, 70वीं प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की याचिका खारिज
नई दिल्ली/पटना। बिहार लोक सेवा आयोग की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद थमता नजर आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस परीक्षा को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत तथ्यों को अपर्याप्त बताते हुए यह फैसला सुनाया।
याचिका में लगाए गए थे पेपर लीक और अनियमितता के आरोप
13 दिसंबर 2024 को हुई प्रारंभिक परीक्षा को लेकर कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र लीक हुआ था। कुछ केंद्रों पर लाउडस्पीकर के जरिए उत्तर बताए जाने की भी बात सामने आई थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के समक्ष व्हाट्सएप मैसेज और वीडियो क्लिप्स प्रस्तुत कर अपने दावों को साबित करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी कहा कि 24 प्रश्न कोचिंग संस्थानों के मॉक टेस्ट से मेल खाते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों को ठोस न मानते हुए याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तुत किए गए डिजिटल साक्ष्य की प्रमाणिकता संदिग्ध है। वीडियो क्लिप्स और संदेशों में ऐसा कुछ नहीं मिला जिससे यह साबित हो सके कि पूरे राज्य में परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई। अदालत ने यह भी कहा कि पेपर लीक के आरोप केवल बापू परीक्षा केंद्र तक ही सीमित थे, जहां पहले ही पुनर्परीक्षा कराई जा चुकी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में मॉक टेस्ट से मेल खाना सामान्य
याचिका में यह भी दावा किया गया था कि कोचिंग संस्थानों के मॉक टेस्ट और परीक्षा प्रश्नों में समानता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में ऐसा होना असामान्य नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि परीक्षा में चार सेट थे और मिलाकर प्रश्न तैयार किए गए थे। उन्होंने कहा कि 150 में से केवल दो प्रश्न हूबहू मॉक टेस्ट से लिए गए थे।
कोर्ट ने जताई चिंता, हर परीक्षा विवादों में घिर रही
सुनवाई के दौरान जस्टिस मनमोहन ने चिंता जताई कि आजकल शायद ही कोई परीक्षा बिना विवाद के संपन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों की असुरक्षा का फायदा उठाकर कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं, जिससे पूरे सिस्टम पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि संदेह के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती।
पहले पटना हाईकोर्ट ने भी की थी याचिकाएं खारिज
इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने मार्च में इस मामले पर सुनवाई करते हुए सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि किसी अन्य परीक्षा केंद्र से अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए मुख्य परीक्षा पर रोक नहीं लगाई जा सकती। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला बीपीएससी की 70वीं परीक्षा को लेकर उठे विवादों पर अंतिम मोहर की तरह देखा जा रहा है। अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिना ठोस सबूत के किसी परीक्षा को रद्द नहीं किया जा सकता। यह फैसला न केवल अभ्यर्थियों के लिए, बल्कि परीक्षा संस्थानों के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि कानूनी प्रक्रिया में तथ्य और प्रमाण सबसे अहम होते हैं। अब बीपीएससी की मुख्य परीक्षा तय समय पर आयोजित होने की पूरी संभावना है।


