चुनाव से पहले चिराग का बड़ा बयान, कहा- मेरा प्रदेश मुझे बुला रहा, अधिक समय तक केंद्र में नहीं रहूंगा
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक अहम बयान देकर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे लंबे समय तक केंद्र में नहीं रहना चाहते, क्योंकि उनका प्रदेश उन्हें बुला रहा है। उन्होंने कहा कि उनके पिता स्व. रामविलास पासवान केंद्र की राजनीति में सक्रिय थे, लेकिन उनकी प्राथमिकता “बिहार फर्स्ट” है। उनके इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी सीधी भागीदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। चिराग के इस बयान से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वे बिहार की राजनीति में एक बार फिर पूरी ताकत के साथ उतर सकते हैं। बीजेपी के प्रवक्ता प्रभाकर मिश्रा ने चिराग की सक्रियता का स्वागत करते हुए कहा कि वे अपने पिता की तरह दलितों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि चिराग की सक्रियता से एनडीए को दलित वर्ग का व्यापक समर्थन मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, चिराग के इस बयान पर विरोधी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रामविलास पासवान के भाई और चिराग से अलग हो चुके पशुपति पारस गुट ने इस बयान को स्व. पासवान का अपमान बताया। उनके प्रवक्ता श्रवण अग्रवाल ने कहा कि चिराग सीएम बनने के लिए ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ देख रहे हैं और यह सब एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उनका आरोप है कि 2020 की तरह इस बार भी बीजेपी चिराग को मोहरा बनाकर जेडीयू को कमजोर करना चाहती है। आरजेडी ने भी इस घटनाक्रम को बीजेपी की रणनीति बताया है। पार्टी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने एक नया राजनीतिक प्रयोग शुरू किया है जिसका मकसद जेडीयू और नीतीश कुमार को राजनीति के हाशिए पर धकेलना है। उन्होंने कहा कि बीजेपी अपने सहयोगियों के साथ कभी ईमानदार नहीं रही और हमेशा सत्ता के लिए चालें चलती है। कुल मिलाकर, चिराग पासवान के इस बयान ने बिहार की राजनीति में गर्मी ला दी है। उनके चुनावी मैदान में उतरने की अटकलों के बीच सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि चिराग की “बिहार फर्स्ट” नीति राज्य में कितना असर डालती है और क्या वे वास्तव में एनडीए को मजबूती देंगे या फिर विपक्ष के आरोपों के अनुसार कोई नई चाल का हिस्सा बनेंगे।


