महागठबंधन में भगदड़ : दो विधायकों ने कांग्रेस का हाथ छोड़ा, तीर पर जताया भरोसा
पटना। कांग्रेस को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा है। दो विधायकों ने कांग्रेस के हाथ का साथ छोड़ जदयू के तीर को अपना लिया। 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर गोविंदपुर से निर्वाचित विधायक पूर्णिमा यादव और बरबीघा से निर्वाचित विधायक सुदर्शन कुमार ने जदयू का दामन थाम कांग्रेस को सकते में डाल दिया है। वहीं दोनों विधायकों के पार्टी छोड़े जाने की सूचना पर पार्टी नेतृत्व हाथ मलते रह गया। जबकि पिछले सप्ताह से दोनों विधायकों के निष्कासित करने पर विचार चल रहा था। इन सभी नेताओं का प्रदेश जदयू कार्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेता व सांसद ललन सिंह, मंत्री अशोक चौधरी, नीरज कुमार समेत अन्य नेताओं ने पार्टी की सदस्यता दिलायी और स्वागत किया।
बता दें महागठबंधन के तीनों प्रमुख दलों राजद, कांग्रेस और रालोसपा में मची भगदड़ से बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। पिछले दिनों राजद के लगभग आधा दर्जनों विधायकों ने लालटेन को दरकिनार करते हुए जदयू का तीर थाम लिया था, जबकि राजद मात्र एक बड़े चेहरे के रूप में पूर्व मंत्री श्याम रजक को अपने पाले में लाने में कामयाब रहा। वहीं अब कांग्रेस के दो विधायकों एवं रालोसपा प्रमुख के करीबी अभिषेक झा ने जदयू का दामन थाम कर महागठबंधन को सकते में डाल दिया है। जबकि राजद नेता कहते रहे हैं कि जदयू के कई बड़े नेता उनके संपर्क में हैं, लेकिन नतीजा अब तक शून्य है।
पार्टी में मचे भगदड़ पर कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य प्रेमचंद्र मिश्रा ने कहा कि इन दोनों विधायकों के जाने से पार्टी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इन दोनों को पिछले पांच सालों में कांग्रेस की गतिविधियों में कभी सक्रिय नहीं देखा गया। अब पार्टी में वफादार और संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले कार्य कार्यकर्ताओं को तरजीह देने का वक्त आ गया है। उन्होंने कहा कि दोनों विधायकों ने डूबते नाव पर सवारी की है। चुनाव में बीजेपी-जेडीयू की हार तय है।


