गयाजी में युवक ने चचेरे भाई का किया मर्डर, वारदात के बाद खुद पहुंचा थाने, पुलिस ने किया गिरफ्तार
गयाजी। बिहार के गयाजी जिले में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहां शेरघाटी थाना क्षेत्र के नई बाजार मोहल्ले में एक युवक ने अपने ही चचेरे भाई की गोली मारकर हत्या कर दी। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी सीधे थाने पहुंच गया और हत्या की बात कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया है और संपत्ति विवाद में रिश्तों के बिखराव की एक और दुखद मिसाल पेश कर दी है।
वारदात और आरोपी की गिरफ्तारी
मृतक की पहचान दीपक गुप्ता (35) के रूप में हुई है, जबकि आरोपी का नाम राजेश बताया गया है। जानकारी के अनुसार दोनों के बीच लंबे समय से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने अंततः रिश्ते को खूनी मोड़ पर पहुंचा दिया। घटना के बाद राजेश खुद शेरघाटी थाने पहुंचा और हत्या की बात स्वीकार की। पुलिस ने तत्काल उसे हिरासत में लेकर हथियार जब्त किए और पूछताछ शुरू कर दी।
घटनास्थल से बरामद साक्ष्य
राजेश की निशानदेही पर पुलिस ने घटनास्थल से दीपक का खून से लथपथ शव बरामद किया। मौके से एक पिस्तौल, पांच खोखे और एक जिंदा कारतूस बरामद किए गए। साथ ही शराब की खाली बोतलें भी पड़ी मिलीं। पुलिस का मानना है कि दोनों पहले साथ में बैठकर शराब पी रहे थे। इसी बीच किसी बात पर कहासुनी बढ़ गई और राजेश ने दीपक पर गोलियां चला दीं।
परिवार और संपत्ति का विवाद
इस मामले की जड़ संपत्ति का बंटवारा है। बताया जाता है कि राजेश के चाचा द्वारिका प्रसाद गुप्ता की कोई संतान नहीं थी। उनकी दो बेटियां थीं, लेकिन बेटा नहीं था। उन्होंने अपने भतीजे दीपक को बचपन में ही गोद ले लिया था और बाद में वसीयत के जरिए अपनी संपत्ति का मालिक भी बना दिया था। द्वारिका प्रसाद और उनकी पत्नी की मृत्यु के बाद दीपक ही उनकी संपत्ति की देखरेख करता था। यही बात राजेश को नागवार गुजर रही थी और वह लगातार नाराज चल रहा था।
करोड़ों की संपत्ति का मालिक था दीपक
मृतक दीपक अविवाहित था और अकेले ही नई बाजार मेन रोड पर बने बड़े मकान में रहता था। उसके पास करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन-जायदाद भी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि दौलत की भूख ने ही इस हत्या को जन्म दिया। दीपक दिवंगत कारोबारी द्वारिका प्रसाद गुप्ता का इकलौता दत्तक पुत्र था, जबकि उनकी दोनों बेटियां ससुराल में बस चुकी थीं और शेरघाटी से उनका संपर्क कम हो गया था।
वारदात के समय की परिस्थितियां
हत्या का समय भी चौंकाने वाला था। जब शहर में विजयदशमी के अवसर पर रावण दहन कार्यक्रम चल रहा था और सुरक्षा बलों का ध्यान मैदान की सुरक्षा पर केंद्रित था, उसी दौरान यह वारदात अंजाम दी गई। थाने और आसपास के इलाकों में अपेक्षाकृत सन्नाटा था, जिसका फायदा उठाकर राजेश ने अपराध को अंजाम दिया।
पुलिस की कार्रवाई
शेरघाटी के सहायक पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपी राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटनास्थल से मिले हथियार और अन्य साक्ष्यों को जब्त कर लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के आधार पर मामले की गहन पड़ताल की जा रही है।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल और थाने के बाहर जुट गए। लोग चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे थे कि संपत्ति की लालच ने ही इस हत्या को अंजाम दिया है। कई लोगों का मानना है कि दीपक अविवाहित था और उसके बाद पूरी संपत्ति राजेश को ही मिलने वाली थी, लेकिन अधीरता और लालच ने उसे हत्या जैसा बड़ा अपराध करने पर मजबूर कर दिया। गयाजी की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि संपत्ति विवाद कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है। खून के रिश्ते लालच और द्वेष की आग में जलकर राख हो गए। दीपक की मौत से न केवल परिवार बल्कि पूरा मोहल्ला शोक और आक्रोश में है। पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और जल्द ही अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। यह घटना समाज को चेतावनी देती है कि दौलत की लालच इंसान को किस हद तक गिरा सकता है और रिश्तों की अहमियत कितनी जल्दी खत्म हो सकती है।


