दीघा सेतु घाट पर दर्दनाक हादसा: नहाने के दौरान चार बच्चे गंगा में डूबे, दो के शव बरामद
- तीन घंटे की मशक्कत के बाद दो किशोरों का मिला शव, दो की तलाश जारी
- परिजनों ने प्रशासन पर लापरवाही का लगाया आरोप, सुबह फिर शुरू होगा खोज अभियान
पटना। दीघा थाना क्षेत्र स्थित दीघा सेतु घाट पर रविवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां नहाने के दौरान चार बच्चे अलग-अलग समय पर गंगा नदी में डूब गए। इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और मातम का माहौल है। सूचना मिलने के बाद पुलिस और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीम मौके पर पहुंची और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दो बच्चों के शव बरामद कर लिए गए, जबकि बाकी दो की तलाश अभी जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, जक्कनपुर निवासी आदित्य कुमार उर्फ प्रिंस (15 वर्ष) और दानापुर के सुल्तानपुर कुशवाहा पंचायत निवासी कृषु कुमार (16 वर्ष) के शव नदी से बाहर निकाले गए हैं। वहीं श्री कृष्णा पुरी न्यू पुनाईचक निवासी करण कुमार (13 वर्ष) और एक अन्य अज्ञात बच्चे की खोज अभी भी जारी है। प्रशासन ने बताया कि सभी बच्चे नहाने के लिए घाट पर गए थे, लेकिन अचानक गहरे पानी में चले जाने के कारण यह हादसा हुआ। दीघा थाना प्रभारी के अनुसार, पहला बच्चा दोपहर करीब 1 बजे डूबा, जबकि दूसरा और तीसरा बच्चा लगभग 2:30 बजे के आसपास डूबे। चौथा बच्चा शाम करीब 4:30 बजे नदी में समा गया। घटनाएं अलग-अलग समय पर हुईं, जिससे राहत कार्य में भी चुनौती बढ़ गई। अब तक तीन बच्चों की पहचान हो चुकी है, जबकि एक की पहचान अभी नहीं हो पाई है। इस हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है। करण कुमार के चाचा और जदयू नेता नागेंद्र गिरी ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए। उनके अनुसार, जब बच्चे डूब रहे थे, तब स्थानीय लोग मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन प्रशासनिक टीम राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के आने का इंतजार करती रही। काफी देर बाद जब टीम पहुंची, तब जाकर खोज अभियान शुरू किया गया। नागेंद्र गिरी ने यह भी बताया कि शाम ढलने के कारण खोज अभियान को बीच में ही रोक दिया गया, जिससे परिजनों में और आक्रोश फैल गया। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि सोमवार सुबह फिर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया जाएगा और बाकी लापता बच्चों को खोजने की पूरी कोशिश की जाएगी। करण कुमार के बारे में बताया गया कि वह आठवीं कक्षा का छात्र था और अपनी मां के साथ घाट पर स्नान करने गया था। इसी दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। वहीं कृषु कुमार के पिता राजू चौधरी ने बताया कि उनका बेटा किसी अन्य बच्चे को बचाने के प्रयास में खुद गंगा में कूद गया था, लेकिन वह भी गहरे पानी में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि घाट पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, न ही वहां चेतावनी संकेत या तैराकों की व्यवस्था थी। अगर समय रहते उचित व्यवस्था होती, तो शायद इस तरह की घटना टाली जा सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घाट पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी। वहीं मृतकों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन भी दिया गया है। यह हादसा एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता की कमी को उजागर करता है, जहां थोड़ी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी में बदल जाती है।


