बिहार में शिक्षक तबादला नीति में बड़ा बदलाव, सरकार ने शिक्षकों की मांगों के आगे बदले कई फैसले
- 31 अक्टूबर तक सभी शिकायतों के समाधान का शिक्षा मंत्री का भरोसा, ऐच्छिक तबादले और पसंद के विद्यालय चुनने की सुविधा
- पांच वर्ष की सेवा के बाद अनिवार्य तबादले की शर्त में भी ढील, नए शिक्षकों और हाल में स्थानांतरित शिक्षकों को भी मिला आवेदन का अवसर
पटना। बिहार में शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया के बीच राज्य सरकार ने अपनी नीति में कई महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने गुरुवार को कहा कि 31 अक्टूबर 2026 तक शिक्षकों की सभी मांगों और शिकायतों का समाधान कर दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, तब शिक्षकों से भी अपेक्षा होगी कि वे विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। सरकार के हालिया निर्णयों से स्पष्ट है कि शिक्षक संगठनों की आपत्तियों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण नीति में कई अहम संशोधन किए गए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार अब तक 73 हजार 151 शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। प्रारंभिक योजना के तहत ऐसे विद्यालयों में, जहां शिक्षकों की कमी थी, अतिरिक्त शिक्षकों का अनिवार्य समायोजन किया जाना प्रस्तावित था। इस व्यवस्था के अनुसार आवश्यकता वाले विद्यालयों में शिक्षकों को उनकी इच्छा के विरुद्ध भी भेजा जा सकता था। सरकार का उद्देश्य सभी विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना था, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। हालांकि इस प्रस्ताव का शिक्षक संगठनों ने व्यापक विरोध किया और इसे शिक्षकों की व्यक्तिगत एवं पारिवारिक परिस्थितियों के प्रतिकूल बताया।शिक्षक संगठनों की आपत्तियों के बाद सरकार ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार किया। 31 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया ऐच्छिक होगी। अर्थात यदि कोई शिक्षक अपना स्थानांतरण नहीं चाहता है तो उसे उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य विद्यालय में नहीं भेजा जाएगा। सरकार के इस निर्णय को शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे पहले अनिवार्य समायोजन की संभावना को लेकर शिक्षकों में असमंजस और चिंता का माहौल था। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को अपनी पसंद के विद्यालय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। प्रत्येक शिक्षक न्यूनतम एक और अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प दे सकेगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति केवल उन्हीं विद्यालयों में की जाएगी, जिन्हें शिक्षक स्वयं अपने विकल्प के रूप में चुनेंगे। यदि कोई शिक्षक स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसे उसके वर्तमान विद्यालय में ही कार्यरत रहने दिया जाएगा। इस प्रकार किसी भी शिक्षक को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य विद्यालय में नहीं भेजा जाएगा। विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से शिक्षकों को अपनी सुविधा और पारिवारिक परिस्थितियों के अनुरूप विद्यालय चुनने का अवसर मिलेगा तथा अनचाहे स्थानांतरण की आशंका समाप्त होगी। सरकार ने स्थानांतरण नियमों में एक और महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए परिवीक्षा अवधि से संबंधित शर्त में भी राहत प्रदान की है। सामान्यतः परिवीक्षा अवधि पूरी किए बिना किसी शिक्षक को स्थानांतरण का लाभ नहीं दिया जाता था, लेकिन इस बार हाल के महीनों में नियुक्त हुए शिक्षकों को भी आवेदन करने की अनुमति दी गई है। इस निर्णय का लाभ विशेष रूप से तृतीय चरण की शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया से चयनित शिक्षकों, प्रधान शिक्षक तथा प्रधानाध्यापकों को मिलेगा। इससे ऐसे शिक्षकों को भी अपनी आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरण का अवसर प्राप्त होगा, जिन्हें पहले इस प्रक्रिया से बाहर रखा जाता था। सरकार ने पिछले दो वर्षों के भीतर स्थानांतरित हो चुके शिक्षकों को भी पुनः आवेदन करने की अनुमति देकर अपनी नीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पहले यह माना जा रहा था कि हाल ही में स्थानांतरित शिक्षकों को दोबारा आवेदन का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन संशोधित व्यवस्था के बाद वे भी स्थानांतरण प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे व्यावहारिक और शिक्षक हित में बताया है। इसी प्रकार सरकार ने पांच वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद अनिवार्य स्थानांतरण के प्रस्ताव में भी संशोधन किया है। प्रारंभिक नियमावली में यह प्रावधान था कि पांच वर्ष पूरे करने वाले शिक्षकों का अनिवार्य रूप से स्थानांतरण किया जाएगा। इस प्रस्ताव का भी शिक्षक संगठनों ने विरोध किया था। उनका कहना था कि सभी शिक्षकों की परिस्थितियां समान नहीं होतीं। पारिवारिक जिम्मेदारियां, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, बच्चों की शिक्षा तथा अन्य सामाजिक कारणों को देखते हुए प्रत्येक शिक्षक पर एक जैसा नियम लागू करना उचित नहीं होगा। सरकार ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए इस शर्त में भी ढील दे दी है। अब पांच वर्ष की सेवा पूरी होने के बावजूद किसी शिक्षक का स्थानांतरण अनिवार्य नहीं होगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इन संशोधनों से स्थानांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनेगी। वहीं शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि 31 अक्टूबर तक शिक्षकों की सभी लंबित शिकायतों और मांगों का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इन निर्णयों से शिक्षकों में विश्वास बढ़ेगा और वे पूरी निष्ठा के साथ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


