बिहार में साइबर अपराधियों पर पुलिस का बड़ा प्रहार, सात महीनों में 104 करोड़ रुपये की ठगी की राशि रोकी

  • एक लाख से अधिक वित्तीय शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, सैकड़ों आरोपी गिरफ्तार, हजारों मोबाइल नंबर और संदिग्ध खाते निष्क्रिय
  • तकनीकी जांच, विशेष प्रशिक्षण और डिजिटल अनुसंधान को मिली गति, साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में बढ़ा बिहार

पटना। बिहार में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बिहार पुलिस ने अपने अभियान को और तेज कर दिया है। साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई द्वारा जारी ताजा आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच साइबर ठगी से जुड़ी एक लाख 14 हजार 918 वित्तीय शिकायतें दर्ज की गईं। इन शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने लगभग 104 करोड़ 5 लाख रुपये की ठगी की राशि को रोकने में सफलता प्राप्त की। पुलिस का कहना है कि अब केवल अपराधियों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि पीड़ितों की रकम सुरक्षित रखने और उन्हें वापस दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल अनुसंधान और साइबर गुप्त सूचना तंत्र के सहयोग से अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास लगातार जारी है। बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई राज्य में साइबर अपराध की रोकथाम, तकनीकी अनुसंधान, प्रशिक्षण और जनजागरूकता की प्रमुख संस्था के रूप में कार्य कर रही है। इकाई की ओर से वित्तीय धोखाधड़ी, सामाजिक माध्यमों के दुरुपयोग, डिजिटल ठगी तथा अन्य साइबर अपराधों की निगरानी और जांच आधुनिक तकनीकी साधनों की सहायता से की जा रही है। पुलिस का कहना है कि शिकायत प्राप्त होते ही त्वरित कार्रवाई कर संबंधित खातों और लेन-देन को रोकने का प्रयास किया जाता है, ताकि पीड़ितों की आर्थिक क्षति कम से कम हो सके। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जनवरी से जुलाई 2026 के बीच वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित कुल एक लाख 14 हजार 918 शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों में लगभग 104 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि को होल्ड कराया गया। इस अवधि में राशि रोकने का प्रतिशत लगभग 29.52 रहा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत मिलने से रकम को रोकने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए लोगों से किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत पुलिस और संबंधित सहायता केंद्र से संपर्क करने की अपील की गई है। वित्तीय धोखाधड़ी के अलावा अन्य साइबर अपराधों पर भी पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान सामाजिक माध्यमों तथा अन्य साइबर अपराधों से संबंधित 13 हजार 642 शिकायतें प्राप्त हुईं। वहीं जनवरी से जून 2026 के बीच साइबर अपराध के मामलों में लगभग 9 करोड़ 99 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए। इसी अवधि में कुल 2 हजार 942 प्राथमिकी दर्ज की गईं तथा 552 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इन मामलों में फर्जी ऋण, नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी, नकली वेबसाइट, म्यूल खाते, अस्पताल में भर्ती कराने के बहाने धोखाधड़ी तथा अन्य डिजिटल अपराध शामिल रहे। साइबर अपराधियों के तकनीकी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। जनवरी से जुलाई 2026 के बीच साइबर अपराध में प्रयुक्त अथवा संदिग्ध पाए गए 6 हजार 399 मोबाइल नंबर और 1 हजार 876 अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान संख्या वाले उपकरणों को निष्क्रिय कराया गया। पुलिस का मानना है कि इससे अपराधियों के संचार नेटवर्क और डिजिटल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिली है। साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे ‘साइबर प्रहार’ अभियान के तहत भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। साइबर प्रहार 2.0 अभियान के दौरान म्यूल खातों से जुड़े 1 हजार 215 मामलों में 112 प्राथमिकी दर्ज की गईं तथा 89 लोगों को गिरफ्तार किया गया। वहीं साइबर प्रहार 3.0 के अंतर्गत 536 मामलों में 143 प्राथमिकी दर्ज हुईं और 99 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जुलाई 2026 तक साइबर प्रहार 4.0 के तहत 3 हजार 177 म्यूल खातों से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य साइबर ठगी में उपयोग किए जाने वाले बैंक खातों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करना है। सामाजिक माध्यमों की निगरानी के क्षेत्र में भी बिहार पुलिस लगातार सक्रिय है। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वाले 2 हजार 809 इंटरनेट पते और उपयोगकर्ता पहचान खातों को हटवाने की कार्रवाई की गई। इसके अलावा 738 उपयोगकर्ता खातों को पूरी तरह समाप्त भी कराया गया। इससे भ्रामक, आपत्तिजनक और अवैध सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने में मदद मिली है। राज्य के विभिन्न जिलों में साइबर अपराध के मामलों में लगातार छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की जा रही है। पटना, गया, नवादा, बगहा, जमुई और समस्तीपुर सहित कई जिलों में फर्जी ऋण, नौकरी, अस्पताल में भर्ती, लॉटरी, त्वरित प्रतिक्रिया संकेत, एकीकृत भुगतान प्रणाली तथा सरकारी योजनाओं के नाम पर ठगी करने वाले गिरोहों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। जांच के दौरान मोबाइल फोन, सिम कार्ड, चेकबुक, स्वचालित नकदी निकासी कार्ड, लैपटॉप तथा अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं। साइबर अपराध की जांच को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनवरी 2026 से अब तक पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक, पुलिस अवर निरीक्षक सहित 630 अधिकारियों और कर्मचारियों को साइबर अपराध की जांच, डिजिटल साक्ष्य संकलन और तकनीकी अनुसंधान का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं डिजिटल अनुसंधान प्रयोगशाला में अब तक 72 मोबाइल फोन, 9 हार्ड ड्राइव और 9 लैपटॉप से आंकड़े निकाले जा चुके हैं। इसके अलावा 14 डीपफेक फोटो और वीडियो की जांच तथा 6 क्रिप्टोकरेंसी मामलों का अनुसंधान जारी है। बिहार पुलिस का कहना है कि आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मानव संसाधन के बल पर साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी और अधिक प्रभावी ढंग से जारी रहेगा।

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