राजीवनगर में तीन बच्चों को श्रम विभाग ने उठाया, परिजनों के विरोध के बाद छोड़ा

  • साइकिल दुकान से बच्चों को ले जाने पर मचा हंगामा, पिता ने लगाए पैसे मांगने के आरोप
  • दुकानदार बोला- बच्चे काम नहीं कर रहे थे, परिवार ने कहा साइकिल ठीक करने गए थे बच्चे

पटना। राजीवनगर रोड नंबर 14 इलाके में उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब श्रम विभाग की टीम ने एक निजी सामाजिक संस्था की सूचना पर तीन बच्चों को एक साइकिल दुकान से अपने कब्जे में ले लिया। बच्चों को कथित रूप से बाल श्रम के संदेह में वहां से उठाया गया था। हालांकि परिजनों और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद देर शाम बच्चों को छोड़ दिया गया और वे अपने परिवार के साथ घर लौट गए। घटना के बाद इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी और बहस की स्थिति बनी रही। बच्चों के परिजनों का आरोप है कि उनके बच्चे दुकान पर काम नहीं कर रहे थे, बल्कि अपनी खराब साइकिल ठीक कराने गए थे। वहीं दुकानदार ने भी बच्चों से काम कराने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जानकारी के अनुसार श्रम विभाग की टीम एक निजी सामाजिक संस्था के साथ राजीवनगर रोड नंबर 14 स्थित एक साइकिल दुकान पर पहुंची थी। वहां तीन बच्चे मौजूद थे। टीम ने बच्चों से पूछताछ के बाद उन्हें अपने वाहन में बैठा लिया और अपने साथ लेकर चली गई। इसी दौरान बच्चों की दादी वहां पहुंच गईं। उन्होंने बच्चों को ले जाने का विरोध किया, लेकिन टीम बच्चों को लेकर निकल गई। बाद में परिजन और दुकानदार “अपना घर” पहुंचे, जहां बच्चों को रखा गया था। बच्चों के पिता सूरज कुमार ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे स्कूल से लौटने के बाद अपनी साइकिल बनवाने दुकान पर गए थे। वहां वे खुद ही पेचकस और रिंच लेकर साइकिल ठीक करने लगे थे। इसी बीच टीम वहां पहुंच गई और बच्चों को अपने साथ ले जाने लगी। पिता का कहना है कि उनकी मां ने मौके पर टीम से बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें “अपना घर” आने के लिए कहा गया। सूरज कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि बच्चों को छोड़ने के बदले उनसे पैसे की मांग की गई। उन्होंने कहा कि वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं और किसी प्रकार की रकम देने में सक्षम नहीं थे। पिता के अनुसार बाद में उनसे यह भी कहा गया कि यदि बच्चे संस्था में रहेंगे तो उन्हें पैसे दिए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि बड़े बेटे को वहीं छोड़ने के बदले 75 हजार रुपये और बेटी को रखने के बदले 25 हजार रुपये देने की बात कही गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। जिस साइकिल दुकान से बच्चों को उठाया गया था, उसके दुकानदार ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। दुकानदार का कहना है कि बच्चे उसकी दुकान पर काम नहीं कर रहे थे। वे केवल अपनी साइकिल ठीक कर रहे थे। दुकानदार ने आरोप लगाया कि सामाजिक संस्था से जुड़ी महिला अक्सर उसकी दुकान पर आती रहती हैं और अनावश्यक दबाव बनाती हैं। उसने दावा किया कि इस बार भी बच्चों को छोड़ने के बदले पैसे मांगे गए, लेकिन उसने साफ मना कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी “अपना घर” पहुंच गए। वहां काफी देर तक बहस और विरोध चलता रहा। परिजनों ने बच्चों को जबरन ले जाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई पर नाराजगी जताई। बढ़ते विरोध और विवाद के बाद आखिरकार तीनों बच्चों को छोड़ दिया गया। इसके बाद परिजन बच्चों को अपने साथ घर ले गए। इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि बाल श्रम रोकना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के दौरान सही जांच और संवेदनशीलता भी जरूरी है ताकि निर्दोष परिवारों को परेशानी का सामना न करना पड़े। वहीं कुछ लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है। फिलहाल इस घटना के बाद श्रम विभाग या संबंधित सामाजिक संस्था की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मामले को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।

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