बिहार में नेशनल हाइवे किनारे अतिक्रमण पर चलेगा बुलडोजर, सरकार ने दिया 20 दिनों का अल्टीमेटम
- अवैध ढाबों, होटलों और व्यावसायिक निर्माणों को हटाने का सरकार ने दिया निर्देश
- अनधिकृत पार्किंग और सड़क सुरक्षा को लेकर भी चलेगा राज्यव्यापी अभियान
पटना। बिहार में सड़क सुरक्षा और राष्ट्रीय उच्च पथों को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब पूरे बिहार में राष्ट्रीय उच्च पथों के किनारे बने अवैध ढाबों, होटलों और अन्य व्यावसायिक संरचनाओं पर बुलडोजर चलाया जाएगा। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय उच्च पथ के अधिकार क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अनधिकृत निर्माण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को 20 दिनों के भीतर कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में आयोजित बिहार सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में परिवहन विभाग, पथ निर्माण विभाग, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा पुलिस मुख्यालय के अधिकारी मौजूद थे। बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर कई अहम फैसले लिए गए, जिनमें राष्ट्रीय उच्च पथों के किनारे अतिक्रमण हटाना प्रमुख रहा। बैठक में निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय उच्च पथ के अधिकार क्षेत्र में बने सभी अवैध ढाबा, होटल और व्यावसायिक निर्माणों को हटाया जाएगा। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि संबंधित विभाग पहले इन संरचनाओं को स्वयं हटाने के लिए नोटिस जारी करें। यदि तय अवधि के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला राजमार्ग सुरक्षा कार्यबल की ओर से कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय उच्च पथ के अधिकार क्षेत्र में किसी भी नए ढाबा, होटल या व्यावसायिक निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक रहेगी। अब कोई भी नया निर्माण करने से पहले संबंधित विभाग जैसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, राष्ट्रीय उच्च पथ विभाग या पथ निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति के निर्माण करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में अवैध पार्किंग को भी गंभीर समस्या माना गया। सरकार ने निर्णय लिया कि राष्ट्रीय उच्च पथों पर भारी और व्यावसायिक वाहनों की अनधिकृत पार्किंग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा। अब वाहन केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े किए जा सकेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों और संचालकों पर जुर्माना लगाने के साथ अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार ने ढाबा, होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए भी नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिन प्रतिष्ठानों का प्रवेश सीधे राष्ट्रीय उच्च पथ से है, उन्हें स्वयं वैकल्पिक पहुंच मार्ग तैयार करना होगा। इसके साथ प्रवेश और निकास की अलग व्यवस्था बनानी होगी। यदि ऐसा नहीं किया गया तो राष्ट्रीय उच्च पथ नियंत्रण अधिनियम 2002 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पथ निर्माण विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय उच्च पथ के अधिकार क्षेत्र से बाहर स्थित लेकिन सड़क सुरक्षा क्षेत्र के भीतर आने वाली संरचनाओं को भी संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा। नियम के अनुसार आवासीय क्षेत्रों के लिए 40 मीटर और व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए 75 मीटर तक का क्षेत्र सड़क सुरक्षा क्षेत्र माना गया है। इस दायरे में आने वाले निर्माणों पर भी सरकार की निगरानी रहेगी। सरकार के इस फैसले के पीछे सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है। बैठक में बताया गया कि नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी और तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के कारण भीषण सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं। इन हादसों में कुल 34 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। बिहार सरकार की यह कार्रवाई उन्हीं निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। राज्य सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय उच्च पथों पर अतिक्रमण और अनधिकृत पार्किंग सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। सरकार अब सड़क सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती। आने वाले दिनों में पूरे बिहार में बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर राष्ट्रीय उच्च पथों को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाएगा।


