पटना में ठेकेदार रिशु श्री के ठिकानों पर एसवीयू की बड़ी छापेमारी, टेंडर घोटाले और विदेश यात्राओं की जांच तेज

  • सरकारी निविदाओं में हेराफेरी और अधिकारियों को लाभ पहुंचाने के आरोपों पर दस्तावेजों की गहन पड़ताल
  • दरभंगा के प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्र मोहन पासवान के छह ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई, कई संपत्तियों की जांच जारी

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार और सरकारी टेंडरों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। बुधवार को विशेष निगरानी इकाई ने राजधानी पटना सहित कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर बड़े स्तर पर जांच शुरू की। इस कार्रवाई के केंद्र में चर्चित ठेकेदार रिशु श्री रहे, जिन पर सरकारी निविदाओं में हेराफेरी कर अपनी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे हैं। विशेष निगरानी इकाई की टीम ने पटना के मीठापुर स्थित उनके आवास समेत कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी और सुबह से देर शाम तक दस्तावेजों, बैंक खातों, डिजिटल उपकरणों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच करती रही। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि सरकारी विभागों में निविदाएं हासिल करने के लिए किस प्रकार अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के साथ संपर्क बनाए गए। रिशु श्री पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सरकारी टेंडर हासिल करने के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा के कुछ अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेश यात्राओं का खर्च उठाया था। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। करीब छह महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय की एक रिपोर्ट में रिशु श्री का नाम सामने आया था। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने दो भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों और उनके परिवारों को यूरोप तथा ऑस्ट्रेलिया की विदेश यात्राएं कराई थीं। जांच एजेंसियों के अनुसार इन यात्राओं में हवाई सफर, होटल और अन्य खर्चों का भुगतान कथित तौर पर रिशु श्री द्वारा किया गया था। बताया जाता है कि यह सब सरकारी टेंडरों में लाभ दिलाने के बदले किया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक वरिष्ठ महिला भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी के घर की छत पर की गई महंगी बागवानी का खर्च भी कथित तौर पर रिशु श्री ने वहन किया था। बताया जा रहा है कि इस पर लगभग नौ लाख रुपये खर्च हुए थे। विशेष निगरानी इकाई के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पंकज दराद ने पहले ही इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की चिट्ठी मिलने की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि मामला निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव के पास भेजा गया है और अनुमोदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है। रिशु श्री पहले से ही धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत जांच का सामना कर रहे हैं। पिछले वर्ष नवंबर में प्रवर्तन निदेशालय ने अहमदाबाद, सूरत, गुरुग्राम, दिल्ली और अन्य शहरों में उनके नौ ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस कार्रवाई में जांच एजेंसी को 33 लाख रुपये नकद, कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए थे। एजेंसियों को संदेह है कि विभिन्न सरकारी विभागों में ठेके हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर कमीशन का खेल चल रहा था। इधर आर्थिक अपराध इकाई ने भी दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्र मोहन पासवान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने बुधवार सुबह से उनके छह अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। इनमें केवटी प्रखंड मुख्यालय स्थित सरकारी कार्यालय और आवास के अलावा मधुबनी जिले के बाबूबरही स्थित पैतृक घर, सीतामढ़ी का एक ठिकाना और दरभंगा जिले के बहादुरपुर थाना क्षेत्र में स्थित निजी आवास शामिल हैं। जांच एजेंसियां प्रखंड विकास पदाधिकारी की आय, संपत्ति, बैंक खातों और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि सुबह सात बजे से ही अधिकारियों की टीम सभी ठिकानों पर मौजूद रही और कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए हैं। हालांकि अभी तक जांच एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राज्य में लगातार हो रही इन कार्रवाइयों को सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में आर्थिक अपराध इकाई, विशेष निगरानी इकाई और प्रवर्तन निदेशालय ने कई बड़े मामलों में कार्रवाई की है। सरकार का दावा है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और सरकारी योजनाओं में ईमानदारी सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आ सकती है। फिलहाल दोनों मामलों में जांच एजेंसियां दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की गहराई से पड़ताल कर रही हैं। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद कई नए नाम सामने आ सकते हैं और प्रशासनिक तथा राजनीतिक हलकों में इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।