सम्राट कैबिनेट की आज अहम बैठक, विकास योजनाओं और नई नियुक्तियों पर लग सकती है मुहर
- शाम पांच बजे होगी बिहार मंत्रिमंडल की बैठक, विभिन्न विभागों के बड़े प्रस्तावों पर होगी चर्चा
- खेल परिसर, उपग्रह नगर, पुलिस बहाली और आधारभूत ढांचे से जुड़े फैसलों के बाद आज फिर कई बड़े निर्णयों की संभावना
पटना। बिहार सरकार की महत्वपूर्ण मंत्रिमंडलीय बैठक बुधवार शाम पांच बजे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रही है। राजधानी पटना में होने वाली इस कैबिनेट बैठक को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी हलचल है। माना जा रहा है कि बैठक में राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार, नियुक्तियों और विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी जा सकती है। बैठक में राज्य सरकार के सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद शाम छह बजे आधिकारिक प्रेस ब्रीफिंग के माध्यम से फैसलों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। सरकार की इस बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में सम्राट चौधरी सरकार लगातार बड़े और दूरगामी फैसले लेती रही है। ऐसे में आज की बैठक से भी कई नई घोषणाओं और योजनाओं की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, बैठक में आधारभूत संरचना, शिक्षा, शहरी विकास, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े प्रस्तावों पर विशेष चर्चा हो सकती है। पिछले सप्ताह हुई कैबिनेट बैठक में कुल 13 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। उस बैठक में खेल और विमानन क्षेत्र से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए थे। सरकार ने अरवल और औरंगाबाद में खेल परिसर निर्माण की स्वीकृति दी थी। इसके साथ ही सलखुआ में बाहरी खेल मैदान विकसित करने का निर्णय लिया गया था। खेल विभाग द्वारा इन परियोजनाओं को लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य राज्य में खेल सुविधाओं का विस्तार करना और युवाओं को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना है। पिछली बैठक में गया से बैंकॉक के बीच सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई थी। इसके लिए राज्य सरकार विमानन कंपनी को आर्थिक सहयोग देगी। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा सीमाई सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीमा महानिरीक्षक का नया पद सृजित करने का निर्णय भी लिया गया था। राज्य सरकार ने विशेष कार्य बल में अनुभवी पुलिसकर्मियों की लंबी प्रतिनियुक्ति को भी मंजूरी दी थी। सरकार का कहना है कि इससे उग्रवाद, संगठित अपराध और सीमाई सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस की क्षमता और मजबूत होगी। बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। सम्राट चौधरी सरकार की पहली मंत्रिमंडल बैठक में बिहार के 11 नए उपग्रह नगर विकसित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था। इसके तहत पटना, सोनपुर, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, पूर्णिया और अन्य शहरों के आसपास आधुनिक नगर बसाने की योजना को मंजूरी मिली थी। इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर अस्थायी रोक भी लगाई गई थी ताकि योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा सके। सरकार इन नगरों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी में है। इसके अलावा राज्य सरकार ने बुजुर्गों को राहत देने के उद्देश्य से 80 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के लिए घर जाकर जमीन निबंधन की सुविधा शुरू करने का भी फैसला लिया था। यह निर्णय बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। दूसरी कैबिनेट बैठक में रोजगार और बहाली से जुड़े बड़े फैसले किए गए थे। बिहार पुलिस में 20 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई थी। वहीं शिक्षा विभाग, यातायात पुलिस और वन एवं पर्यावरण विभाग में भी हजारों पदों पर बहाली की स्वीकृति दी गई थी। सरकार का कहना है कि इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे और प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होगी। सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। तीसरी मंत्रिमंडल बैठक में सीतामढ़ी मेडिकल कॉलेज का नाम “माता सीता मेडिकल कॉलेज” करने का निर्णय लिया गया था। इसके अलावा कई जिलों में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मंजूरी दी गई थी। इन विद्यालयों के लिए जमीन नाममात्र शुल्क पर दी जाएगी। राज्य सरकार शहरी विकास को गति देने के लिए विश्व बैंक से करीब 4700 करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी भी कर रही है। इस राशि का उपयोग शहरों की आधारभूत संरचना, सड़क, जल निकासी और अन्य विकास कार्यों में किया जाएगा। 13 मई को हुई मंत्रिमंडल बैठक में राज्य के करीब नौ लाख सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को राहत देने वाले कई फैसले लिए गए थे। इससे सरकारी कर्मियों में उत्साह का माहौल देखा गया था। अब सभी की नजर आज होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि सरकार आज भी कई ऐसे फैसले ले सकती है, जिनका सीधा असर राज्य के विकास, रोजगार और प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ेगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, लगातार हो रही मंत्रिमंडलीय बैठकों और बड़े फैसलों के जरिए सरकार आगामी समय के लिए अपनी विकास प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने की कोशिश कर रही है।


